Sun. Apr 21st, 2019

जालिआवाला नरसंहार ब्रिटेन के इतिहास का बड़ा दाग : टेरीज़ा मे

  • जालियांवाला नरसंहार पर टेरीज़ा मे ने ‘अफ़सोस’ जताया, लेकिन माफ़ी नहीं मांगी
  • टेरीज़ा मे ने ख़ुशी जाहिर किया आज भारत और ब्रिटेन के रिश्ते आपसी सहयोग, सुरक्षा, समृद्धि और दोस्ती पर आधारित हैं

ब्रितानी प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे ने 1919 में हुए जालियांवाला बाग़ नरसंहार के लिए संसद में ‘अफ़सोस’ जताया है. टेरीज़ा मे ने बुधवार को ब्रितानी संसद में कहा कि पंजाब के अमृतसर में हुआ जालियांवाला नरसंहार ब्रिटेन के इतिहास में एक ‘शर्मनाक’ दाग़ की तरह है.

मे ने ब्रितानी संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ़ कॉमन्स’ में प्रधानमंत्री के साप्ताहिक प्रश्नों के जवाब की शुरुआत करते हुए कहा, “1919 में हुई जालियांवाला बाग़ त्रासदी ब्रितानी-भारतीय इतिहास पर एक शर्मनाक धब्बा के समान है.

जैसा कि महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय ने साल 1997 में जालियांवाला बाग़ के दौरे के पहले कहा था कि ये भारत के साथ हमारे अतीत का एक दर्दनाक उदाहरण है.”

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री ने जताया अफ़सोस

मे ने अपने बयान में कहा,”उस वक़्त जो कुछ भी हुआ और त्रासदी की वजह बना, हमें उसका बहुत पछतावा है.

मुझे ये ऐलान करते हुए ख़ुशी है कि आज भारत और ब्रिटेन के रिश्ते आपसी सहयोग, सुरक्षा, समृद्धि और दोस्ती पर आधारित हैं.”

टेरीज़ा मे के इस बयान के बाद विपक्षी लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन ने कहा कि इस नरसंहार में जिन लोगों ने अपनी जानें गंवाईं वो जो कुछ हुआ उसके लिए स्पष्ट और बिना शर्त माफ़ी मांगे जाने के हक़दार हैं.

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