फिल्म डेस्पिकेबल मी 3 में सुनने को मिलेगी जानी पहचानी नानी की आवाज

एक्टर अली असगर के मुंह से जनानी आवाज सुन-सुन कर बोर हो गए हों तो उनकी असल आवाज सुनने के लिए 3 डी एनिमेशन फिल्म डेस्पिकेबल मी 3 देख सकते हैं। हालांकि फिल्म औसत ही है और बच्चों को या मिनियन्स के फैंस को ही पसंद आने की उम्मीद है।
दमदार आवाज वाले कलाकार इन दिनों काफी डिमांड में हैं। हॉलीवुड वाले अपनी फिल्में यहां रिलीज करने से पहले यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उनके किरदारों की आवाज वे एक्टर्स बनें, जिनकी आवाज हिंदीभाषियों के बीच पहले से लोकप्रिय है।

ऐसी ही एक आवाज है ‘दि कपिल शर्मा शो’ की पूर्व दादी यानी अली असगर की, जो टेलीविजन के जरिये घर-घर तक पहुंच चुकी है। अली ने एनिमेशन फिल्म डेस्पिकेबल मी 3 के दो किरदारों के लिए वॉइस ओवर किया है, पर ऐसा लगता है कि डबल धमाल के चक्कर में अली इस बार वह असर नहीं जगा सके, जिसकी उनसे उम्मीद की जाती है।

उर्दू लहजे वाले किरदार ग्रू पर तो उनकी आवाज खूब जंची है, पर दूसरे किरदार ड्रू की पंजाबी लहजे वाली भारी आवाज के लिए वह कोशिश करते नजर आए, जो साफ पता चल रही है।

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सिरीज की इस तीसरी किस्त के हीरो मिनियन्स न होकर ग्रू है, जिसका मुकाबला इस बार बालथाजार ब्रैट नाम के विलेन से है। ब्रैट बचपन में एक मशहूर टीवी शो में एक बिगड़े हुए बच्चे का रोल निभाता था, पर जब वह बड़ा हुआ, तो उसे शो से निकाल दिया गया और शो बंद कर दिया गया।

इस बात से खफा ब्रैट बड़ा होने के बाद भी एक बिगड़े बच्चे की तरह ही व्यवहार करता रहा और खुद को खतरनाक विलेन साबित करने की होड़ में लगा गया। वह बबलगम बम फेंकने में और डांस फाइट करने में माहिर होता है। ग्रू और ब्रैट के बीच हुई एक मुठभेड़ में वह उसे चकमा देकर भाग जाता है इस वाकये से नाराज होकर ग्रू की नई बॉस उसे व उसकी पत्नी लूसी वाइल्ड को नौकरी से निकाल देती है।

इस नई परेशानी से घिरा ग्रू तब और उदास हो जाता है, जब मिनियन्स भी उसके अच्छा इंसान बनने की वजह से बोर होकर उसका साथ छोड़ देते हैं।
एक दिन ग्रू को पता चलता है कि उसका एक जुड़वा भाई भी है और वह उससे मिलने निकल पड़ता है। दोनों भाइयों के मिलन के बाद शुरू होता है एक नया रोमांचकारी सफर। फिल्म में हीरो से ज्यादा दिलचस्प किरदार है इसका विलेन यानी ब्रैट। ब्रैट का लड़ने का अंदाज, उसकी बबलगम बम फैक्ट्री वगैरह सब एक अजूबे की तरह लगता है।

ग्रू की तीन बेटियां भी बेहद प्यारी लगी हैं। ग्रू के भाई ड्रू कई बार जब उर्दू में ‘हमें कश्ती में ही रहना चाहिए था बरखुरदार!’ तो बरबस ही हंसी आ जाती है। और मिनियंस को हम कैसे भूल सकते हैं! नीली पैंट पहनने वाले ये पीले जीव इस बार जेल चले जाते हैं। इन सभी को सफेद काले रंग के कपड़ों में देखना बेहद मजेदार है। हालांकि इस बार मिनियंस का रोल बहुत छोटा है, और साथ ही फिल्म में उनकी भूमिका भी अहम नहीं है। फिल्म का म्यूजिक अच्छा है और गति तेज है। कहानी और डायलॉग्स में और नएपन की गुंजाइश थी। फिल्म का तकनीकी पक्ष मजबूत है पर 3 डी इफेक्ट्स और बेहतर हो सकते थे।