मनोविकृति से बढ़ता है बच्चों में आत्महत्या का खतरा

सिडनी, 6 सितम्बर (बचपन एक्सप्रेस): जो बच्चे ऐसी आवाजे सुनते हैं या ऐसी चीजें देखते हैं, जो अन्य लोग नहीं देख सकते, उनमें आत्महत्या करने का खतरा सामान्य बच्चों से पांच गुना अधिक होता है। शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया है। इस शोध के निष्कर्षो से पता चलता है कि अन्य लोग भी जो सामान्यत: स्वस्थ हैं, लेकिन उन्हें कभी कभार मतिभ्रम या भ्रम हो जाता है, उनमें भी आत्महत्या करने की प्रवृत्ति दो गुना तक अधिक होती है।

ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड के प्रोफेसर जॉन मैक्ग्रेथ ने बताया, “12 साल से कम उम्र के उन बच्चों में आत्मघाती विचार पांच से छह गुना अधिक होता है, जो मनोविकृति के शिकार होते हैं।”

मैक्ग्रेथ कहते हैं, “मानसिक मनोवैज्ञानिक अनुभव सामान्य मनोवैज्ञानिक संकट के निशान हैं।”

यह शोध जेएएमए साइकैट्री पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

शोध दल ने सामान्य आबादी में मनोवैज्ञानिक अनुभव और आत्महत्या के जोखिम के बीच के संबंधों की जांच की और इसमें 19 देशों के 33,000 लोगों को शामिल किया।

मैक्ग्रेथ ने बताया, “इस शोध में अवसाद, चिंता और सिजोफ्रेनिया से ग्रसित लोगों को शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा मनोवैज्ञानिक विकार अपेक्षा से कही अधिक आम पाया गया। 20 में से एक व्यक्ति ने अपने जीवन के किसी न किसी मोड़ पर मनोवैज्ञानिक विकार का अनुभव किया है।”

शोधकर्ताओं ने कहा कि इन नतीजों का आत्महत्या जोखिम की जांच करने वाले डॉक्टरों के लिए जारी किए जानेवाले सार्वजनिक स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों पर महत्वपूर्ण प्रभाव हो सकता है। क्योंकि वे दुर्लभ हैं और उनकी भविष्यवाणी करना मुश्किल है।