मेरठ की जनसभा में मायावती ने बीजेपी पर साधा निशाना

उत्तर प्रदेश (मेरठ), 18 सितम्बर 2017 (बचपन एक्सप्रेस): राज्यसभा से इस्तीफे के बाद मायावती ने मेरठ के वेदव्यासपुरी मैदान में मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल के 71 विधानसभा क्षेत्रों से आए कार्यकर्ताओं और समर्थकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार की तरह यूपी में योगी सरकार भी हवा-हवाई साबित हुई है। यूपी में कानून व्यवस्था का बुरा हाल है। भ्रष्टाचार बढ़ गया है। कर्जमाफी के नाम पर किसानों के साथ मजाक किया जा रहा है। शिक्षामित्रों के मामले में प्रदेश सरकार की नियत साफ होती तो उन्हें रोजगार देती।

मायावती ने केन्द्र और प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा पूरी तरह आरएसएस और हिन्दुत्व के एजेंडे पर काम कर रही है। गरीब, अल्पसंख्यक ओर दलितों का उत्पीड़न हो रहा है। रोहित वेमुला कांड और गुजरात का ऊना कांड इसके उदाहरण हैं। जब सहारनपुर के शब्बीरपुर में दलितों का उत्पीड़न हुआ और वह संसद में बोलना चाहती थी मगर बोलने नहीं दिया गया। मजबूरी में मुझे इस्तीफा देना पड़ा।  चुनाव में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई, जिसका खामियाजा सभी विपक्षी पार्टियों को भुगतना पड़ा।

उन्होंने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में जब ईवीएम में गड़बड़ी हुई तब देश की जनता में कांग्रेस के प्रति बड़ा गुस्सा था, जिसकी वजह से ईवीएम की गड़बड़ी उजागर नहीं हो पाई। अब हम चुप बैठने वाले नहीं हैं।  उन्होंने आरोप लगाया कि सहारनपुर के शब्बीरपुर में महाराणा प्रताप की जयंती पर हुए मामूली विवाद को भाजपा सरकार ने वर्ग संघर्ष का रूप दे दिया। जब यह बात खुल गई तो उस दलित संगठन पर दिखाने के लिए कार्रवाई भी की। दलितों का भारी उत्पीड़न हुआ। भाजपा सरकार चाहती थी कि मायावती शब्बीरपुर पहुंचेगी तो अपने वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए उत्तेजित करने वाले भाषण देंगी ओर लोग जोश में  हिंसक हो जाएंगे। इसकी आड़ में मेरी हत्या करने की साजिश रची गई थी। मायावती ने कहा कि मैंने सूझबूझ का परिचय दिया और सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय पर अपना भाषण केंद्रित रखा। इससे भाजपा का गेम प्लान फ्लॉप हो गया।  अंबेडकर को भी अपनी बात रखने के लिए कानून मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। दलितों के हित में मैंने भी राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया।