गोधरा कांड : गुजरात उच्च न्यायालय ने 11 की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला

अहमदाबाद, 9 अक्टूबर 2017 (बचपन एक्सप्रेस): गुजरात उच्च न्यायालय ने 2002 में हुए गोधरा ट्रेन आगजनी मामले में फांसी की सजा पाए 11 दोषियों की सजा को सोमवार को उम्रकैद में बदल दिया। गोधरा कांड में 59 कार सेवक मारे गए थे।

मृत्युदंड की सजा पाने वाले 11 दोषियों ने फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी।

एसआईटी की एक विशेष अदालत ने एक मार्च 2011 को इस मामले में 31 लोगों को दोषी करार दिया था और 63 को बरी कर दिया था। इनमें से 11 लोगों को फांसी की सजा सुनाई थी और 20 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

15 साल पहले गुजरात के गोधरा रेलवे स्टेशन पर एक घटना घटी। अयोध्या से चलकर साबरमती एक्सप्रेस स्टेशन के करीब पहुंच रही थी, ठीक उसी वक्त ट्रेन के एस-6 बोगी को आग की लपटों ने अपनी गिरफ्त में ले लिया था। एस-6 बोगी में मौजूद लोग चीखते-चिल्लाते रहे, लेकिन बोगी का दरवाजा नहीं खुल पाया और 59 कार सेवकों की मौत हो गई। इस घटना को लेकर तमाम तरह की दलीलों के साथ जमकर राजनीति हुई। यूपीए सरकार के दौरान रेल मंत्रालय ने यूसी बनर्जी समिति गठित की और समिति ने कहा कि साबरमती एक्सप्रेस की एस-6 बोगी में लगी आग महज दुर्घटना थी। हालांकि अदालत ने यूसी बनर्जी समिति को अमान्य घोषित कर दिया था। आयोगों और राजनीति के बीच 2011 में विशेष अदालत ने गोधरा कांड के 11 आरोपियों को दोषी मानते हुए फांसी की सजा दी। लेकिन गुजरात हाइकोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है।