मेरी तीन कहानियां - मुम्बई से गोवा - दूसरा अध्याय-

मेरी तीन कहानियां  - मुम्बई से गोवा - दूसरा अध्याय-


सनोज भाई के रोटी की मांग ने मानो भूचाल ला दिया। एक बार फिर रोटिया आने लगी वही बगल मे बैठी शालिनी दीदी लगातर हमसे बॉम्बे डाईन्ग की फैक्ट्री मे आने के लिये कह रही थी। हम थे की अपनी नीची नजरो से सारे जवाब दिये जा रहे थे। जब उस सुन्दर लड्की जिसे वो नौकरानी बता रहे थे, उसने मानो विद्रोही आवाज मे बताया की अब और रोटी नही बन सकती क्योकि आटा ही खत्म हो गया। बुआ भी उसका दर्द समझते हुए हमे फल और जूस देने लगी।
अब मौका था आराम का और हम एक कमरे मे आ गये। सनोज ने बताया की उसके भाई कुछ उदास थे, क्योकि उनकी नयी नवेली पत्नी अपने प्रेमी के साथ फरार हो गयी। पर दुख का कारण कुछ और था। उसे शादी मे गिफ्ट के तौर पर जो पानी का जहाज दिया था वो भी वो ले गयी। सनोज अपने भाई के गम मे दुखी थे। पर असल मुद्दे पर तो अभी बात होनी बाकी थी। सनोज को ये गम सताये जा रहा था कि उसने नौकरानी को प्रणाम कर दिया था। मैने बहुत समझाया कि इसमे उसका कोई दोष नही है। हमारी कल्पना मे जो एक नौकरानी का चेहरा है वो उसमे फिट नही बैठती है। पर अपराध ऐसा कि उसकी ग्लानि जा ही नही रही थी।
हमे एक ड्राईवर के साथ कार की व्यवस्था कर दी गयी थी। पर दिल तो अपने स्टेटस को लेकर व्याकुल था। हम इस बात को समझ चुके थे की इस घर मे एक-दो दिन यानी रोज अपनी नजरो मे गिरते जाना। हमने प्लान बनाया की बुआ को बिना बताये हम भाग लेंगे। और वही किया। घोर दुपहरी मे जब बुआ सो रही थी हमने धीरे से अपना समान लिया और नीचे गाड़ी मे आ गये।
ड्राईवर ने पुछा की आप लोगो को कहां छोड दू।हमने कहा की किसी अच्छे होटल मे ले चलो।वो हमे अन्धेरी के एक होटल मे लेकर चला गया।
होटल मे आकर थोडी राहत की सांस ली पर होटल के रिसेप्सन पर लिखा कुछ पढ कर हम सोच मे पड़ गये। वहा लिखा था की अपना कीमती सामन रिसेप्सन पर जमा कर दे और इनके खोने पर होटल की कोई जिम्मेदारी नही होगी। वैसे तो हमारे पास कुछ कीमती था नही पर उसे पढकर मन थोडा सशन्कित हो गया।
हम होटल से बाहर आ गये और जीवन का पहला ज्ञान मिला। एक काफी खूबसूरत लड्की अपने एक हाथ मे लम्बी सिग्रेट और दुसरे हाथ मे बोतल पकड़े हुए थी। सनोज तो मानो जड़ हो गये। आंखे चेहरे से बाहर कूदती नजर आ रही थी। ऐसा दृश्य अभी एक ज्ञान नौकरानी को देख के मिला था अब दूसरा तो मानो हमारी आत्मा को झकझोर गया।
किसी तरह सनोज को मै आगे खीच कर ले गया।मैने अपने ज्ञान कोश से शब्दो को निकाल कर उन्हे समझाने की कोशिश की कि ये मायनगरी है। घोर कलयुग की कल्पना से मन बैचन हो उठा। लगा की अब तो पृथ्वी के नष्ट होने का समय आ गया।

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