अब बस करो सहन करने की हद ख़त्म न हो जाए !

अब बस करो सहन करने की हद ख़त्म न हो जाए !

कुछ लोग फेस बुक पर कविता लिख कर राष्ट्रीय नागरिकता कानून पर भावपूर्ण विचार व्यक्त कर रहे है पर उनको तस्वीर के पीछे का सच देखना सीखना होगा | किसी कानून को लेकर सड़क पर आ जाना और देश के नागरिको और संपत्ति का नुकसान करना कही से भी उनकी तकलीफ को जायज नहीं ठहरा सकता |

कवि हृदय में सिर्फ मुगलों के लिए दर्द और उनकी तलवार से जिबह हुए लोगो के लिए चंद आसूं भी नहीं . वाह रे कवि और क्या है कविता ... देश का बटवारा धर्म के आधार पर हुआ और भारत और पाकिस्तान बन गया | भारत के हिन्दुओ ने एक धर्म निरपेक्ष देश बनाया और पाकिस्तान के मुसलमानों ने इश्लामी देश जहा पर रहने वाले हिन्दुओ को क़त्ल कर आज उनकी संख्या ख़त्म कर दी |

पर भारत जिसने अपने हर नागरिक को धार्मिक आजादी दी , स्वतंत्र हवा दी , और आगे बढ़ने की छूट दी जिसमे हिन्दू बहुसंख्यक आबादी ने अपने देश में धार्मिक अल्प संख्यको को आगे बढाया आज वही हिन्दू ओवैसी जैसे के निशाने पर है | आज उसी हिन्दू से उसके देश में बर्बरता पूर्ण व्यवहार उन्ही लोगो द्वारा किया जा रह है जिन्हें पाल -पोस कर बड़ा किया |

आज वो हिन्दू कट्टर हो गया जिसने इश्लाम के हर गुट को भारत में पनाह दी | आज पनाह देने वाला ही गुनाहगार हो गया | इस हिंसा को देखकर दो राष्ट्र के सिद्धांत को अब वो भी सच मानने लगे जिन्होंने कभी भी धर्म के आधार पर विभेद नही किया | अगर ये हिंसा ऐसे ही जारी रही तो भारत के मुसलमान हर उस आम हिन्दू का सपोर्ट खो देंगे जो उनको इस धरती पर पैर जमा कर रखने में मददगार है |

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