अब कहा छुप गए दलित नेता और अवार्ड वापसी गैंग

मध्य प्रदेश में एक और शर्मनाक हत्या होती है और पुरे देश में कही बवाल नहीं होता है | हर बात पर दलित -दलित का राग अलापने वाले दलित नेता भी इस जघन्य हत्या पर कुछ नहीं बोल रहे है | अवार्ड वापसी गैंग को सिर्फ अखलाख की याद आती है और अगर धर्मप्रसाद को जिन्दा जलाया जाता है तो न अवार्ड वापस न ही मोमबत्ती गैंग है कही |

जामिया के स्वतंत्रता गैंग को नीद आ गयी है और जे एन यू में गहरी शांति है | मातम मानाने के लिए क्या किसी एक सम्प्रदाय का ही होना जरुरी है | अखिलेश और प्रियंका जी भी चुप ही है |

ये किस तरह का विमर्श है जहा पर मौत -मौत का खेल होता है | अगर ये मरा तो भारत रहने लायक नहीं और वो मरा तो मरता रहे हमें क्या \

ये नए भारत की तस्वीर है जहाँ मौत का मातम भी जात और धर्म को देख कर मनाया जाने लगा है | यही पर इन्सान को इंसान नहीं वोट बैंक बना दिया गया है | अगर मारने वाले का वोट बैंक ज्यादा है तो हम चुप रहेंगे और अगर मरने वाले का वोट बैंक ज्यादा है तो हम चुप नहीं रहेंगे \

क्या तस्वीर है ….

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