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अब का करें रिन्किया के पापा

अब का करें रिन्किया के पापा

भारतीय राजनीति में आप के दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन से इस बात की पुष्टि हो जाती है कि सिर्फ चिल्लाने से राजनीति नहीं चलने वाली आपको जनता के सामने ये साबित करना होगा की आप बेहतर काम कर सकते है |

दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों को इस चुनाव के बाद सोचना चाहिए की आम आदमी पार्टी का दिल्ली चुनाव में लगातार दूसरी बार भारी बहुमत से जीतना जनता की बदलती सोंच का परिणाम है | भारतीय जनता पार्टी ने जहा सारे दिग्गजों को उतार दिया था वही आम आदमी पार्टी का अदना सा कार्यकर्त्ता अगर नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के चुनाव प्रचार के बाद जीत जाता है तो ये खतरे की घंटी है |

भाजपा का नेत्रित्व को लेकर घिसा -पीटा फैसला भी इसके लिए जवाबदेह है | जनता रिन्किया के पापा गाना तो चाव से सुनती है पर गायक को मुख्य मंत्री के रूप में नहीं देख पायी | रही -सही कसर टीवी पर उनके साक्षात्कार ने पूरी कर दी |

कई बार अति आत्मविश्वास उलट वार कर देता है ये भाजपा को दिल्ली के विषय में सोचना चाहिय | हर्षवर्धन जैसे नेता जो दिल्ली में बहुत पापुलर है उनको आगे लाने से एक अच्छा चेहरा दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट हो पाया होता |

शिक्षको से दूर होती भाजपा को उनसे नजदीकी बढ़ानी पड़ेगी | देश भर में चाहे केन्द्रीय यूनिवर्सिटी हो या स्टेट हर जगह फण्ड की कमी और शिक्षक और छात्रो की घटती सुविधाओं ने इस पार्टी को ओपिनियन लीडर्स से दूर कर दिया है | यूनिवर्सिटी में शिक्षक और छात्र या तो भाजपा के विरोध में है या चुप है |

देश में हायर एजुकेशन की खस्ता हालत ने भी इन चुनावो पर असर डाला है | अरविन्द केजरीवाल से ख़ुशी का सबसे बड़ा कारण स्कुलो और कॉलेज की अच्छी इमेज है | अब धरातल पर क्या है ये तो वक़्त बताएगा पर दिल्ली चुनाव में इन ओपिनियन लीडर्स ने आप के पक्ष में माहौल बना दिया और परिणाम आपके सामने है-

कांग्रेस की विजय अब पराजय की ओर जायेगी क्योंकि जनता ने उनको नवजीवन दिया था पर वो उस पर खरे नहीं उतर रहे है | भारतीय जनता पार्टी अगर चाहती है कि वो आने वाले समय में अच्छा करे तो वो पढ़े लिखे , साफ़ सुथरी छवि के शिक्षको को चुनाव में उतारे और अपनी छवि बदले नहीं तो आम आदमी पार्टी आने वाले चुनाव में उनको कड़ी टक्कर ही नहीं देगी बल्कि कई राज्यों में सत्ता से बेदखल कर देगी |

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