अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ताओ की जानवरों से बदतर पिटाई - क्या ये गणतंत्र है ?

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ताओ की जानवरों से बदतर पिटाई - क्या ये गणतंत्र है ?

महाराष्ट्र के एक मंत्री का काफिला क्या रुका उनके साथ चलने वालो का गुस्सा सातवे आसमान पर - फ़ीस वृद्धि की मांफी की मांग कर रहा विद्यार्थी परिषद् का कार्यकर्त्ता निहत्था आपके सामने खड़ा है और उन्हें जानवरों की तरह घसीट कर पीटना कहा का जनतंत्र है -

https://twitter.com/ANI/status/1298645587949051904

अब्दुल सत्तार की गाड़ी रोकने के जुर्म में जिस तरह की पिटाई की गयी वो किसी भी संगठन के लिए ठीक नहीं है - हां अगर अखिल भारतीय परिषद् के कार्यकर्ता कोई हिंसा करते या अभद्रता करते तो ये कारवाई समझ में आती है पर सिर्फ नारे लगाने पर ऐसी पिटाई उचित नहीं है -

कई छात्र संगठन इस बात की शिकायत करते रहते है की जब उनकी सरकार नहीं होती तो उनके छात्र संगठनो के साथ काफी दुर्व्यवहार होता है - इसमें सभी संगठन को साथ आने की जरुरत है और ये छात्र के हित की बात है -

आज भारत में छात्र एक शक्ति नहीं रह गया बल्कि विभिन्न संगठनो का वैचारिक गुलामी करता नजर आता है - छात्र के मुद्दे पर सभी को एक होना चाहिए चाहे वो किसी भी राजनीतिक संगठन से जुड़े हो तभी समाज में राजनीतिक व्यवस्था पर अंकुश लगाया जा सकता है -

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