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भक्तों के लिए खुले अन्नपूर्णा माता के द्वार:--

भक्तों के लिए खुले अन्नपूर्णा माता के द्वार:--

आरती बचपन एक्सप्रेस :- श्री समृद्धि की कामना हेतु दीपावली और धनतेरस का पर्व त्रयोदशी तिथि से शुरू हो जाता है और इसके साथ ही पांच दिवसीय दीपज्योति पर्व श्रृंखला की शुरुआत हो जाती है।

गौरतलब है कि धनतेरस के दिन ही हम आयुर्वेद दिवस मनाते हैं क्योंकि भगवान धन्वंतरि आयुर्वेद के जनक थे और धनतेरस पर हर साल हम उनकी जयंती मनाते हैं और इसी दिन से विश्वनाथ मंदिर के रेड जोन में स्थित स्वर्णमयी अन्नपूर्णा माता के दर्शन को भक्तों का भीड़ उमड़ आता है । माता का यह दरबार साल में सिर्फ 4 दिनों के लिए खुलता है ।

मां के दर्शन के साथ-साथ प्रसाद स्वरूप सौभाग्यशाली अठन्नी पाने के लिए भक्तों की बेचैनी देखते बनती है ।चार दिनों तक लंबी कतार लगी रहती है । बाबा विश्वनाथ के आंगन में विराजमान माता अन्नपूर्णा धनतेरस के दिन भक्तों को प्रथम दर्शन देंगी, माना जाता है की भक्तों में साल भर इस दर्शन की बेचैनी बनी रहती है क्योंकि जब माता के दरबार में स्वयं काशी विश्वनाथ बाबा याचक की भूमिका में खड़े रहते हैं तो भक्तों की क्या विषाद ।

यह अठन्नी भक्तों के लिए किसी कुबेर के खजाने से कम नहीं होती। मान्यता है कि काशी नगरी के पालन पोषण को देवाधिदेव मां के कृपा पर ही आश्रित हैं अन्य दात्री मां की ममतामई स्वर्ण प्रतिमा कमल आसन पर विराजमान रजत शिल्प में ढले भगवान शिव की झोली में अन्नदान की मुद्रा में हैें । दाएं ओर मां लक्ष्मी और बाएं तरफ भूदेवी का स्वर्ण विग्रह है।

इस अनूठे और अलौकिक दरबार के दर्शन वर्ष में सिर्फ 4 दिन धनतेरस से अन्नकूट तक होते हैं। प्रसाद के रूप में धान का लावा बतासे के साथ मां का खजाने के रूप में 50 पैसे के सिक्के बांटे जाने की पुरानी परंपरा है माना जाता है कि काशी विश्वनाथ बाबा से पहले यहां देवी अन्नपूर्णा विराजमान थी ।स्वर्णमयी मां की प्राचीनता का उल्लेख भीष्मपुराण में भी मिलता है ।1775 में जब काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण शुरू हुआ तब भी माता का यह मंदिर विराजमान था ।

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