चीन की तरह भारत में भी बड़े व्यापारियों पर इस तरह की कार्रवाई होनी चाहिए

चीन की तरह भारत में भी बड़े व्यापारियों पर इस तरह की कार्रवाई होनी चाहिए

चीन में अलीबाबा के उपर गंभीर कारवाई करते हुए २.५ बिलियन डॉलर का जुर्माना लगा दिया जिसे उस कंपनी को भरना होगा | पर इस जुर्माने का कारण क्या है ? कारण साफ़ है की किसी एक व्यक्ति या संस्था को देश के हर बिजनेस में नहीं घुसने देंगे |

क्योंकि अलीबाबा के पास बहुत पैसा है और वो जिस भी व्यापार में जाएगा वहा पर वो अन्य छोटे व्यापारी को या तो व्यापार ख़त्म करने पर मजबूर कर देगा या फिर अपने में मिला लेगा | दूर से देखने पर ये फ्री ट्रेड के सिद्धांत के खिलाफ लगता है पर नजदीक से देखे तो किसी एक व्यक्ति की मोनोपली अगर समाज में या व्यापार में हो जाए तो वो देश के लिए कभी भी खतरा हो सकता है |

भारत में भी इस तरह की स्तिथियाँ हो रही है | जहाँ एक और चंद व्यापारी मिलकर भारत के धन का एक बड़ा हिस्सा ले कर बैठे है वही राजनीतिक पार्टियों में नेताओ की कमी भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है |

समाज के संतुलन के लिए सभी के हाथ में पैसा और अधिकार जरुरी है | पर आज ऐसी स्तिथि बन रही है जहाँ पर व्यापार दो चार व्यापारी घरानों तक सीमित हो गया है | उनका बढ़ना समस्या नहीं है पर दुसरो का घटना समस्या है |

जिस तरह चीन ने मीडिया के क्षेत्र में घुसने पर अलीबाबा की नकेल कस दी वैसा ही भारत में भी होना चाहिए | क्या ये जरुरी है की अदानी, अम्बानी, टाटा, बिडला अन्य व्यापार छोड़ मीडिया में क्या कर रहे है |

इनकी उपस्तिथि मीडिया के स्वावलंबन पर सवाल है | और स्वतंत्र मीडिया के विचार से परे है | अगर सरकार और खासकर समाज ये चाहता है की उसका अधिकार न छीने तो उसे छोटे मीडिया हाउस का समर्थन करना होगा |

अगर आज छोटा अखबार ग्रुप मर गया या इनके द्वारा खरीद लिया गया तो आपके अधिकारों की बात करने वाला कोई नही रहा जाएगा | समाज के लिए जितना पक्ष जरुरी है उतना ही विपक्ष |

इसी तरह अम्बानी की भी जरुरत है पर आम आदमी के जेब में पैसे की भी जरुरत उतनी ही है | आज अलीबाबा पर कार्रवाई कर चीन ने राष्ट्र पहले का जो उदाहरन दिया है उसे हमें भी मानना चाहिए | कुछ लोग जो ये डर दिखाते है की इससे फ्री ट्रेड को नुक्सान होगा वो उनके स्वार्थ से जुड़ा हुआ है |

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