उद्धव की ताजपोशी शानदार पर सत्र शुरू करने पर विवाद

राजनेता है कि राजनीति से बाज नहीं आते और कोई भी कदम उठाते समय इस बात का ध्यान नहीं रखा जा रहा है कि नई सरकार को वक्त मिलना चाहिए उद्धव ठाकरे प्रशासनिक पदों पर कभी नहीं रहे हैं और अगर उनसे कोई छोटी मोटी गलती होती है तो उसको नजरअंदाज करना चाहिए।पर भारतीय राजनीति में अब सहिष्णुता के लिए जगह नहीं है|

विपक्षी दल के नेता की इज्जत करना गुजरे जमाने की बात हो गई है नहीं तो एक वक्त ऐसा था जब अटल बिहारी बाजपाई नेहरू के भाषण की प्रशंसा करते थे और नेहरू युवा नेता के वाक्य कौशल की प्रशंसा करते थकते नहीं थे|


भारत सरकार ने 288 सदस्यों वाली विधानसभा में 169 मत लेकर विश्वास मत हासिल कर लिया पर पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा और उसके कुछ सहयोगी सदस्यों ने संविधान के उल्लंघन का आरोप लगाया और अपने लोगों के साथ सदन का बहिष्कार कर दिया।

नवीस ने कहा कि पिछले सत्र के अंत में राष्ट्रगान हुआ था इसका मतलब था कि सत्र समाप्त हो चुका है और नए सत्र की शुरुआत राष्ट्रगीत वंदे मातरम के साथ होना चाहिए था लेकिन ऐसा हुआ नहीं जबकि सरकार का पक्ष है कि सत्र नया नहीं है|

इसलिए वंदे मातरम की कोई जरूरत नहीं है।भाजपा के बहिष्कार के बाद कांग्रेस सदस्य अशोक चौहान ने ठाकरे सरकार के पक्ष में विश्वासमत का प्रस्ताव पेश किया राकपा और कांग्रेस ने इसका अनुमोदन किया इस दौरान माकपा और मन से के अलावा ओवैसी की पार्टी तटस्थ रही।

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