उदयपुर में तस्करों ने वनकर्मियों पर की फायरिंग, वनकर्मियों के वाहन के टायर और शीशे पर लगी गोलियां

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उदयपुर में तस्करों ने वनकर्मियों पर की फायरिंग, वनकर्मियों के वाहन के टायर और शीशे पर लगी गोलियां

जिले के भीण्डर थाना क्षेत्र तथा प्रतापगढ़ जिले के लसाडिय़ा फॉरेस्ट रेंज में डाइखेड़़ा गांव के पास देर रात वन विभाग के कर्मचारियों और तस्करों के बीच मुठभेड़ हो गई। वनकर्मियों ने तस्करों का पीछा किया तो तस्करों ने वनकर्मियों पर फायरिंग शुरू कर दी। घटना को लेकर भीण्डर थाने में वन विभाग ने तस्करों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

घटना के समय रैंजर सोनम मीणा तथा उनकी टीम तस्करों का पीछा कर रही थी कि तस्करों ने वन विभाग की टीम पर फायरिंग की। जिसमें वनकर्मी बाल-बाल बच गए लेकिन उनकी चलाई गोलियों से वनकर्मियों के वाहन का टायर फट गया तथा शीशा टूट गया। भीण्डर थाना पुलिस ने सोमवार सुबह घटनास्थल का निरीक्षण कर तस्करों की चलाई गोलियों के तीन खाली खोल बरामद किए हैं।

खैर की लकड़़ी की तस्करी की मिली थी सूचना

उप वन संरक्षक दारासिंह ने बताया कि मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी तस्कर खैर की लकड़ी का अवैध परिवहन कर ले जाने वाले हैं। इस पर रविवार देर रात रैंजर सोनम मीणा, वनरक्षक राजेंद्र डामोर, वेलदार मिठूलाल और वनसमिति के दो सदस्यों की टीम डाइखेडा के समीप मुख्य मार्ग पर नाकाबंदी के लिए भेजा गया। इसी दौरान एक पिकअप गाड़ी और उसे एस्कॉर्ट कर रही कार आते हुए दिखाई दी। वन विभाग की नाकाबंदी देखकर तस्करों ने अपने वाहन घुमा लिए।

सरकारी वाहन के स्टार्ट नहीं होने पर निजी वाहन के जरिए वन विभाग की टीम ने तस्करों के वाहनों का पीछा किया। पहले तो तस्करों ने अपने वाहनों की रफ्तार बढ़ा दी लेकिन वनकर्मियों का पीछा करते देख उन्होंने पहले हवाई फायर किया। वनकर्मियों ने तब भी पीछा जारी रखा तो तस्करों ने वन विभाग की टीम पर फायर किए। जिसमें एक गोली वनकर्मियों के वाहन के टायर लगा, जिससे वह फट गया। दूसरी गोली शीशे को चीरते हुए निकल गई। हालांकि दोनों बार वनकर्मी बाल-बाल बच गए। इसके बाद तस्कर फायर करते हुए निकल भागे। घटनास्थल उदयपुर जिले के भीण्डर थाना क्षेत्र का होने पर भीण्डर थाने में तस्करों के खिलाफ मामला दर्ज कराया।

हथियारों से लैस तस्कर का सामना कर रहे वनकर्मियों के पास डडे

इस घटनाक्रम से वन विभाग में संसाधनों की कमी को उजागर किया है। बताया गया कि वन विभाग की टीम जो नाकाबंदी में लगी थी, उनके पास हथियार के नाम पर महज डंडे थे। जबकि तस्कर हथियारों से लैस। वन विभाग ने फील्ड में रहने वाले अधिकारी और कर्मचारियों को बंदूक तथा पिस्टल दिए जाने की मांग की है।

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