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सहयोग, सहभाव और समावेश से किया गया कर्म बन जाता है काव्य

सहयोग, सहभाव और समावेश से किया गया कर्म बन जाता है काव्य


सहयोग, सहभाव और समावेश की संस्कृति से किया गया कर्म काव्य बन जाता है। लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय द्वारा स्थापित की जा रही इसी कार्यसंस्कृति के कारण लखनऊ विश्वविद्यालय अपने शताब्दी उत्सव काल में सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से नये कलेवर में आगे बढ़ने को तैयार हो रहा है। यह विचार वक्ताओं ने अधिष्ठाता छात्र कल्याण लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा तिलक हास्टल में आयोजित स्वास्थ्य जाँचशिविर सर्वे सन्तु निरामयाः के उद्घाटन के अवसर पर व्यक्त किये। जिसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो आलोक कुमार राय ने अपनी पत्नी संगीता राय की उपस्थित में की।

शिविर का आयोजन छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो पूनम टंडन द्वारा साईं हॉस्पिटल के सहयोग से करवाया गया था। छात्राओं के हीमोग्लोबिन, रक्त तथा स्वास्थ्य जाँच हेतु यह शिविर तिलक हास्टल में आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों से छात्राओं ने परामर्श प्राप्त किया तथा जाँचे करवाईं। सर्वाधिक हीमोग्लोबिन 13.8 और औसतन 11 मापा गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती सङ्गीता राय ने छात्राओं का उत्साहवर्धन किया।

अध्यक्षीय भाषण में कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने कहा कि शारीरिक स्वास्थ्य श्रेष्ठ कार्य निष्पादन के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है, इसीलिये शास्त्रों में कहा है- शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्। विश्वविद्यालय की छात्राएँ हमारे राष्ट्र और समाज की भविष्यनिधि हैं। अतः रोग के प्रभावी होने से पहले ही स्वास्थ्य जाँच द्वारा पता लगाकर इस निधि को सुरक्षित रखे जाने की आवश्यकता है। सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से लखनऊ विश्वविद्यालय इस कार्य को प्रमुखता के साथ कर रहा है।

कार्यक्रम में रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. अनिल शुक्ला, चीफ प्रोवोस्ट प्रो. नलिनी पाण्डेय, चीफ प्राक्टर प्रो. दिनेश कुमार, निदेशक आइ.पी.पी.आर. डा. दुर्गेश श्रीवास्तव, प्रोफेसर नीरज जैन, प्रो. निशी पाण्डेय, प्रो. अमिता कनौजिया, कुलसचिव श्री विनोद कुमार सिंह, डा. अलका मिश्रा, डा. अनुपमा आदि मौजूद रहें। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि श्रीमती संगीता राय तथा कुलपति, अधिष्ठाता छात्र कल्याण आदि ने दीप जलाकर किया।

अराधना मौर्या

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