उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नयी शिक्षा नीति से आएगा अभूतपूर्व बदलाव : प्रो. गोविन्द जी पाण्डेय

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नयी शिक्षा नीति से आएगा अभूतपूर्व बदलाव : प्रो. गोविन्द जी पाण्डेय

भारत सरकार की उच्च शिक्षा नीति शिक्षा को लोकतान्त्रिक , सामाजिक रूप से चैतन्य , संस्कारी , न्यायपूर्ण और मानव मूल्यों से परिपूर्ण बनाने का प्रयास है जो स्वतंत्रता , समानता , भाईचारा और सबके लिए न्याय के सिद्धांत पर आधारित है | शिक्षा ऐसी हो जो जीविका के निर्माण के साथ साथ राष्ट के आर्थिक विकास में सहायक हो | भारत एक ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था बनने की ओर है जिसके फलस्वरूप बहुत बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा की ओर आयेंगे | ऐसे विद्यार्थियों का हमें स्वागत करना है और उन्हें ऐसी शिक्षा देनी है जिससे वो नये भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सके |


इन बातो को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हर स्तर पर स्किल और मूल्य आधारित शिक्षा को प्री स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक शामिल किया जाएगा | आने वाले समय में इस बात का जोर होगा की शिक्षा के क्षेत्र में जो विभिन्न नाम है जैसे , यूनिवर्सिटी , कॉलेज , डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी , इन सब के स्थान पर एक शब्द यूनिवर्सिटी का प्रयोग किया जाए और एकल विषय की जगह बहु विषयों की पढाई के लिए इन सभी उच्च शिक्षा के संस्थान को तैयार किया जाए |


उच्च शिक्षा ऐसी हो जो समाज में उठ रहे सवालो का हल निकालने में सक्षम हो और समाज को दिशा दे सके | इस लिए हमें वैयक्तिक उपलब्धियों की जगह सामाजिक समरसता , संस्कारी , खुश , रचनाधर्मी , और सभी को साथ लेकर आगे जाने वाली शिक्षा देनी होगी | व्यक्तिगत उपलब्धियों की जगह सामाजिक मूल्य और संस्कार के साथ सबका साथ की एक अहम भूमिका उच्च शिक्षा में हो ये इस नई शिक्षा नीति का मूल है |


वर्तमान में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निम्न समस्याएं विद्यमान है –


१) पूरी तरह से बंटी हुई शिक्षा जिसमे एकरूपता नही है |


२) हमारे मानसिक और स्किल के विकास पर ध्यान नही दिया गया है |


३) एक अत्यंत एक रेखीय शिक्षा प्रणाली जिसमे जरा भी लचीलापन नही है |


४) अधिकारवादी शिक्षा का मॉडल जिसमे शिक्षक अधिकारी की भूमिका में है न की सहायक की भूमिका में |


५) शिक्षक और शिक्षा के केंद्र को स्वायत्ता की कमी |


६) शिक्षको को एक ही तराजू में तौलने से अच्छे और बुरे सब एक समान हो जाते है |


७) अच्छे शिक्षक को इंसेंटिव न मिल पाना |


८) नवाचार पर ध्यान न होना और एक ही यूनिवर्सिटी से सैकड़ो कॉलेज का सम्बन्ध होना -


९) अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट सिलेबस में एक रूपता और स्किल हासिल करने के अवसर की कमी |


नयी शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा


इस नीति के तहत अब उच्च शिक्षा के केंद्र बड़े होंगे जिसमे कम से कम तीन हजार छात्र छात्राए एक साथ पढ़ सके | अब बहु विषय पढ़ाने के केंद्र बनेंगे और एक जिले में कम से कम एक इस तरह का केंद्र होगा |


शिक्षको को और ज्यादा स्वायतत्ता दी जायेगी जिससे वो अपने विषय को पढ़ाने के लिए किसी भी तरह का नया प्रयोग कर पायेंगे |


इस में राष्ट्रीय शोध फाउंडेशन बनाया जाएगा जो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उच्च कोटि के शोध को बढ़ावा देगा |


इन विश्वविद्यालयों को चलाने के लिए स्वतंत्र बोर्ड होंगे जिससे इनको शैक्षिक और प्रशासनिक स्वायत्ता मिल सके | इसके साथ साथ शिक्षा में लोगो को जोड़ने के लिए ऑन लाइन लर्निंग को बढ़ावा और ओपन डिस्टेंस लर्निंग के केंद्र बनाने के साथ साथ दिव्यांगो को भी हर तरह से शिक्षा के साथ जोड़ना और वो सभी चीजो को एक्सेस कर पाए इस तरह की व्यवस्था करना इस नई शिक्षा नीति में जोड़ा गया है |


संस्थागत पुनः संरचना एव समेकन (Institutional Restructuring and Consolidation)


इस नयी शिक्षा नीति में सबसे ज्यादा जोर इस बात पर दिया गया है कि उच्च शिक्षा जो एक समान न होकर खंडित रूप में है उसे एकरूपता दिया जाय | विश्वविद्यालय स्तर पर कम से कम तीन हजार छात्र हो और विभिन्न विषयों की शिक्षा दी जाए | इस पालिसी में बताया गया है कि पूर्व में हमारे यहाँ विश्वस्तर के विश्वविद्यालय तक्षशिला , नालंदा , वल्लभी और विक्रमशिला के रूप में थे जहाँ देश और विदेश से आने वाले छात्रो को एक छत के नीचे हर प्रकार की शिक्षा मिला करती थी | अपने पुराने गौरव को हासिल करने के लिए हमें भी बहु विषयो से युक्त विश्वविद्यालय की स्थापना करनी होगी | जहाँ छात्रो को न सिर्फ अच्छा वातावरण मिले बल्कि विभिन्न विषयों में ज्ञान भी प्राप्त हो |


यहाँ कहा गया है की यूनिवर्सिटी वो हो जहाँ स्नातक और परास्नातक और शोध की शिक्षा मिले | वही उच्च शिक्षा के केंद्र ऐसे हो जहाँ एक तरफ शोध केन्द्रित विश्व विद्यालय हो और इस तरह के कॉलेज हो जहाँ पर स्नातक, परास्नातक स्तर की शिक्षा हो और डिग्री के केंद्र हो | इनका मूल स्नातक विषयों पर हो और ये बड़ी यूनिवर्सिटी से कुछ छोटी हो सकती है |


कॉलेज को ज्यादा स्वायतता दी जाए जो एक निष्पक्ष मूल्यांकन पर आधारित हो | कुछ समय के बाद ये सभी कॉलेज या तो डिग्री देने वाले हो जायेंगे या फिर किसी यूनिवर्सिटी से सम्बंधित कॉलेज हो जायेंगे | कुछ प्रयास के बाद डिग्री देने वाले कॉलेज या तो स्वायत्त हो शोध आधारित या शिक्षण आधारित यूनिवर्सिटी में बदले जा सकते है अगर वो चाहे तो |


ये उच्च शिक्षा के केंद्र शिक्षण एवं शोध के अलावा अन्य उच्च शिक्षा के केंद्र को न सिर्फ उनके विकास में मदद करेंगे बल्कि फैकल्टी के विकास और स्कूल शिक्षा के भी विकास में मदद करेंगे |


२०४० तक उच्च शिक्षा के सभी केन्द्रों के एक बहुविषयक शिक्षण केंद्र में बदलना होगा और २०३० तक इसे हांसिल कर २०४० तक कम से कम तीन हजार विद्यार्थियों वाले केंद्र का रूप पाना होगा | हमें वर्तमान में उच्च शिक्षा में नामांकन को २६.३ (2018) के स्तर से बढ़ा कर २०३५ तक ५० प्रतिशत करने का लक्ष्य है |


उच्च शिक्षा संस्थान ओपन डिस्टेंस लर्निंग और ऑनलाइन प्रोग्राम शुरू कर सकते है यदि उनको ऐसा करने के लिए प्रमाणन मिला हो | इस तरह के मोड़ द्वारा दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नही किया जाएगा |


एक विषय में शिक्षा दे रहे उच्च शिक्षा के केंद्र को एक एक कर ख़त्म कर उन्हें बहु शिक्षा केंद्र में बदला जाएगा जिससे विभिन्न विषयों में शोध को बढ़ावा मिल सके | नयी शिक्षा नीति में यूनिवर्सिटी से सम्बद्ध कॉलेज को समय समय पर मूल्याकन कर उन्हें स्वायत्त बनाने की ओर ले चलना होगा जिससे वो अपनी शैक्षिक और आर्थिक जरुरतो को खुद ही पूरा कर सके |


हमारे पुराने साहित्य कादंबरी में अच्छी शिक्षा को ६४ कलाओं के ज्ञान से जोड़ कर देखा जाता है | इस तरह की शिक्षा व्यवस्था में विज्ञान का ज्ञान रखने वाला संगीत और पेंटिंग में भी उतनी ही सिद्धहस्त होता है | हमें विभिन्न विषयों के अतिरिक्त उन विषयों का ज्ञान भी रखना होगा जिसे हम कमतर मानते है |


भारत के जाने माने शिक्षण संस्थान चाहे वो आई आई टी हो या आई आई एम् वो भी कला और समाजविज्ञान के विषयों का प्रशिक्षण देंगे | उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बहुत सारे आने के विन्दु होंगे उसी तरह अगर आप पढाई बीच में छोड़ते है तो उससे निकलने के भी बहुत सारे रास्ते होंगे | पहले अगर कोई विद्यार्थी किन्ही कारणों से पढाई बीच में छोड़ देता था तो उसका पूरा पिछला पढ़ा हुआ बेकार हो जाता है | पर अब क्रेडिट बैंक में आप अर्जित क्रेडिट रख कर कभी भी पुनः एक प्रक्रिया का पालन करते हुए वापस अपनी डिग्री हासिल कर पायेंगे |


इस तरह एक ऐसे सिस्टम से छुटकारा मिलेगा जिसमे छात्र को राहत नही थी और उसकी सामाजिक या आर्थिक मज़बूरी उसको बीच में ही शिक्षा छोड़ने पर मजबूर कर देती थी तो वो डिग्री से वंचित हो जाता था | अब वो कभी भी दिए गए समय के अनुसार वापस आ कर अपनी शिक्षा को जारी रख पायेगा | इसके अलावा अगर वो दो साल के कोर्स में है और एक साल पूरा कर चुका है तो वो डिप्लोमा के लिए योग्य हो जाएगा | अगर वो दुबारा नही भी आता तो भी उस विषय में उसके पास एक सर्टिफिकेट होगा जिसका वो अपने जीविकोपार्जन के लिए इस्तेमाल कर सकता है |


सभी उच्च शिक्षा के संस्थान एक लचीला और रचनात्मक पाठ्यक्रम का निर्माण करेंगे| ये विषय क्रेडिट और प्रोजेक्ट आधारित होंगे जो समुदाय को जोड़ने वाले , पर्यावरण और मूल्य आधारित शिक्षा से सम्बंधित होंगे | पर्यावरण शिक्षा में जलवायु परिवर्तन , प्रदुषण , सफाई , जैव विविधता का संरक्षण , जैव विविधता और जैविक श्रोतो का संरक्षण , वन और वन जीवजन्तु संरक्षण और चिरस्थायी विकास |


नई शिक्षा नीति में डिग्री कार्यक्रमों का समय उनकी संरचना के आधार पर होगा जिसमे पूर्वस्नातक डिग्री तीन से चार साल की होगी और उसमे बहु-निकास और बहु आगमन के द्वार होंगे | साथ ही साथ अगर किसी कारण से कोई एक साल में पढाई छोड़ता है तो उसे सर्टिफिकेट (११.९) और दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन साल में स्नातक की डिग्री मिल जायेगी | वैसे चार साल का बहुविषय स्नातक कार्यक्रम ज्यादा अच्छा होगा जिसमे कई विषयों को शामिल किया जा सकेगा |


ये चार साल का प्रोग्राम डिग्री विथ रिसर्च भी हो सकता है अगर विद्यार्थी ने अपने मुख्य विषय में शोध पे गहन अध्ययन और प्रोजेक्ट किया हो |


परास्नातक दो वर्ष का हो सकता है जिसमे दूसरा साल पूरी तरह शोध पर केन्द्रित हो | ये उनके लिए होगा जिन्होंने तीन साल का स्नातक कार्यक्रम किया है | जिन छात्रो ने चार साल का स्नातक डिग्री ली है उनको एक साल का मास्टर्स कार्यक्रम दिया जा सकता है | इसके अलावा एक पांच साल का इंटीग्रेटेड डिग्री भी दी जा सकती है जिसको करने के बाद सीधे पीएचडी में प्रवेश दिया जा सकता है |


११.११ में मेरु (Multidisciplinary Education and Research Universities, MERU) बहुविषयक शिक्षा और शोध विश्वविद्यालय की स्थापना की जायेगी जो आई आई टी और आई आई एम् के बराबर होगी और शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर को हासिल करने का प्रयास किया जाएगा |


उच्च शिक्षा के संस्थान स्टार्टअप , इन्क्यूबेशन सेंटर , तकनीकी विकास संस्थान , सेंटर फॉर फ्रंटियर एरियाज ऑफ़ रिसर्च , ज्यादा से ज्यादा इंडस्ट्री और शैक्षिक सहयोग , बहु विषयक शोध पर ज्यादा ध्यान देंगे |


ये केंद्र ऐसे रोगों से जिनसे जनता लगातार परेशान होती है उसपर ज्यादा से ज्यादा शोध करे और समाज का मार्गदर्शन करे | एन आर ऍफ़ (NRF) का काम संस्थानों में शोध और इनोवेशन को मदद करना और एक तरह का वातावरण बनाने में सहायक बनना है |


छात्रो के लिए सर्वोत्कृष्ट सीखने का माहौल और सहायता (Optimal Learning Environment and Support for Student):


किसी भी संस्थान या व्यक्ति की तरक्की में रचनात्मकता की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है | इसी तरह किसी भी उच्च संस्थान में छात्र तभी सम्पूर्णता को प्राप्त करता है जब उसको प्रशिक्षण देने वाला रचनाधर्मी हो और जो पाठ्यक्रम हो उसमे रचनात्मकता के लिए जगह हो |


सभी उच्च शिक्षण संस्थान छात्रो के रचनात्मकता को न सिर्फ बढ़ावा देंगे बल्कि विषय केन्द्रित क्लब की गतिविधियों के लिए फण्ड भी उपलब्ध कराया जाएगा | सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रो के लिए उच्च श्रेणी के सहायता केंद्र की स्थापना की जायेगी जिसको उचित मात्रा में फण्ड और शैक्षिक सुविधा प्रदान की जायेगी | छात्रो के लिए परामर्श की सुविधा भी प्रदान की जायेगी जिससे वो अपने करियर , मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य , को ठीक रख सके |


अंतराष्ट्रीयकरन : सभी उच्च शिक्षा के केंद्र ज्यादा से ज्यादा अंतराष्ट्रीय छात्रो को आकर्षित करने का प्रयास करंगे और उनको इस तरह का कार्यक्रम देंगे जिसमे वो अगर इंडिया और उससे बाहर जाकर शोध करना चाहे तो कर पाए |


भारत को एक वैश्विक शैक्षिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा जहा गुणवत्ता युक्त शिक्षा कम खर्च में उपलब्ध हो | सभी उच्च शिक्षा के केंद्र में एक अन्तराष्ट्रीय छात्र ऑफिस खोला जाएगा |


विश्व की शीर्ष १०० विश्वविद्यालयो को भारत में आने का और शिक्षा के केंद्र खोलने का मौका दिया जाएगा |


आने वाले समय में शिक्षक के उपर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा और सभी उच्च शिक्षा के केंद्र में चार साल के इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स का संचालन किया जाएगा | इसे शिक्षाशास्त्र के अलावा किसी और विषय में भी विधिवत शिक्षा दी जायेगी |


जिन्होंने चार साल की डिग्री ली है उनके लिए एक साल का बीएड , जिन्होंने स्नातक की तीन साल की डिग्री ली है उनके लिए दो साल का बीएड कार्यकर्म संचालित किया जाएगा |


वोकेशनल शिक्षा : भारत में एक बहुत ही छोटा समहू है जिसमे वोकेशनल शिक्षा ली है | अगर हम अमेरिका , जर्मनी , कोरिया जैसे देशो से तुलना करे तो ये देश ५२ फीसदी से पिचहत्तर फीसदी लोगो को वोकेशनल ट्रेंनिंग देते है | वही हमारे यहाँ ये संख्या १९ से २४ के आयु वर्ग में मात्र पांच फीसदी है |


अब ये लक्ष्य रखा गया है कि २०२५ तक कम से कम पचास फीसदी लोगो को वोकेशनल शिक्षा दी जाए |


मानव संशाधन मंत्रालय National Committee for the Integration of Vocational Education NCIVE की स्थापना करेगी जो देश में वोकेशनल शिक्षा को बढ़ावा देगी |


राष्ट्रीय शोध संस्थान :


भारत में शोध के क्षेत्र में अभी जीडीपी का मात्र ०.६९ प्रतिशत खर्च होता है वही ये आंकड़ा अमेरिका में २.८ प्रतिशत , ४.३ इजराइल , और ४.२ कोरिया में है |


ये शोध संस्थान सभी प्रकार के शोध को बढ़ावा देगा और फण्ड उपलब्ध कराएगा | ये सरकार ओर विश्वविद्यालयों के बीच सेतू का काम करेगा |


चार वर्टीकल का गठन :


प्रथम :


भारतीय उच्च शिक्षा समिति का गठन (Higher Education Commission of India)


राष्ट्रीय उच्च शिक्षा नियत्रण समिति (NHERC : National Higher Education Regulatory Council) का गठन


द्वितीय :


राष्ट्रीय प्रत्यायन समिति National Accreditation Council : NAC


तृतीय : उच्च शिक्षा वृत्ति समिति (Higher Education Grants Council- HEGC)


चतुर्थ : सामान्य शिक्षा समिति : General Education Council (GEC)


इन सभी चारो वर्टिकल की कार्यप्रणाली स्वायत्त होगी जो नियत्रण (NHERC), प्रत्यायन (NAC), और सामान्य शिक्षा समिति (GEC) जो मुख्य बॉडी भारतीय उच्च शिक्षा समिति के साथ काम करेगी |




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