श्रीराम मंदिर निर्माण में वास्तु एवं मूर्ति कला का अनूठा संगमः पूर्व कुलपति प्रो0 मित्तल

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श्रीराम मंदिर निर्माण में वास्तु एवं मूर्ति कला का अनूठा संगमः पूर्व कुलपति प्रो0 मित्तल

अयोध्या। डाॅ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अर्थशास्त्र एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा ललित कला विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ललित कला का आर्थिक दर्शन विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के पूर्व कुलपति प्रो0 अशोक कुमार मित्तल ने कहा कि विकास के पटल पर अयोध्या अग्रसर है। पूरा प्रदेश एवं देश नए कीर्तिमान को स्थापित करने की ओर जा रहा है। इसमें ललित कला का विशेष योगदान है। प्रभु श्रीराम का मंदिर निर्माण वास्तुकला एवं मूर्ति कला का अनूठा संगम है, जिसमें उसकी रमणीयता और चित्रकला एवं व्यवहारिक कला, कला शिक्षकों की देखरेख में आकर्षक रमणीयता उत्पन्न कर रहा है। अयोध्या में प्रभु श्रीराम मंदिर निर्माण से कला के विभिन्न शैलियों का निश्चित विकास होगा। इस विधा के सभी कलाकारों को आय एवं रोजगार का पर्याप्त अवसर मिल सकेगा।

विशिष्ट अतिथि पटना से आए भारतीय आर्थिक संघ के पूर्व महासचिव एवं कोषाध्यक्ष प्रो0 अनिल ठाकुर ने बताया कि हमारी विभिन्न कलाएं वैदिक कालीन सभ्यता से संबंधित रही है। इसके अंतर्गत सिंधु घाटी की सभ्यता, अजंता एलोरा की गुफाएं एवं प्राचीन वास्तु शैली हमेशा से ही लोगों को स्तब्ध करने वाली रही है। कलाकारों द्वारा प्रभु श्रीराम के मंदिर का मनमोहक एवं आकर्षक भवन निश्चित रूप से अवध क्षेत्र के साथ पूरे देश में रोजगार एवं आय के स्तर को बढ़ाएगा। विशिष्ट अतिथि प्रो0 दिलीप सिंह ने छात्र-छात्राओं को उनकी कलात्मक कलाकृतियों को व्यापक बाजारीकरण के तकनीक से परिचित कराया। कहा कि कि अयोध्या में प्रभु श्री राम मंदिर का निर्माण धनात्मक रूप में फाइन आर्ट्स के आर्थिक दर्शन को सुधारेगा। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड, आर्थिक संघ की नोडल ऑफिसर प्रो0 भारती पांडे ने छात्र-छात्राओं को लघु एवं सूक्ष्म स्वरूप के कलाकृतियों के निर्माण के लिए प्रेरित किया।

कार्यकम्र की अध्यक्षता कर रहे कला एवं मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो0 आशुतोष सिन्हा ने बताया कि संगोष्ठी अवध क्षेत्र के कलाकारों के साथ-साथ पूरे देश के कलाकारों को नई-नई तकनीक को विकसित करने का आधार बनेगा, जिसमें प्रभु श्रीराम मंदिर निर्माण की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। राष्ट्रीय संगोष्ठी की संयोजिका डॉ0 सरिता द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि मंदिर निर्माण के साथ ही गुणात्मक स्वरूप में विभिन्न प्रकार की कलाविधियों का व्यापक विस्तार हो रहा है, जिसमें फाइन आर्ट्स के छात्र-छात्राओं को नई-नई सृजनशीलता के अवसर के साथ-साथ आय एवं रोजगार के अच्छे अवसर प्राप्त होने की संभावना है। अर्थशास्त्र एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रो0 विनोद कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि ललित कला का आर्थिक दर्शन विषय अपनी व्यापकता के साथ-साथ अवध क्षेत्र की संपूर्ण विकास की स्थिति को विश्लेषित करेगा।

कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन ललित कला की श्रीमती रीमा सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ0 अलका श्रीवास्तव, आशीष प्रजापति सरिता सिंह, दिलीप पाल, अनिल कुमार, शिव शंकर यादव, हीरालाल यादव, पल्लवी भारती सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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