बिना किसी लैंगिक भेदभाव के समान कार्य के लिए समान वेतन होः प्रो0 आशुतोष सिन्हा

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बिना किसी लैंगिक भेदभाव के समान कार्य के लिए समान वेतन होः प्रो0 आशुतोष सिन्हा

अयोध्या। डाॅ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के एलएलएम पाठ्यक्रम में दीक्षांत सप्ताह आयोजन के अन्तर्गत संविधान दिवस के अवसर पर ‘इकोनॉमिक जस्टिस एंड ‘इण्डियन कॉन्स्टिटयूशन‘ विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया।

व्याख्यान में मुख्य अतिथि के रूप मे बोलते हुए विश्वविद्यालय के कला एवं मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो० आशुतोष सिन्हा ने बताया कि भारतीय संविधान की उद्देशिका में आर्थिक न्याय की संकल्पना निहित है। राज्य के नीति निदेशक तत्वों में इसे मूर्त रूप देने का प्रयास किया गया है।

पुरुष और स्त्री सभी नागरिको को समान रूप से जीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त करने का अधिकार हो। भौतिक संशाधनों का स्वामित्व एवं नियंत्रण इस प्रकार हो जिससे सामूहिक हित का सर्वोत्तम रूप से साधन हो सके। उन्होंने बताया कि बिना किसी लैंगिक भेदभाव के समान कार्य के लिए समान वेतन हो। आर्थिक विवशता के कारण किसी भी व्यक्ति को अपने स्वास्थ एवं अवस्था के प्रतिकूल उद्योगो में संलग्न न होना पड़े।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक उमानाथ ने कहा कि भारतीय संविधान में आर्थिक न्याय को मूर्त रूप देने की अद्भुत क्षमता है। जनसामान्य को शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण के लिए असहाय अवस्था मे न जाना पड़े, इतनी आर्थिक स्थिति प्रत्येक व्यक्ति की होनी चाहिए जो भारत के राज्य क्षेत्र के अन्तर्गत निवास कर रहा हो। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विधि संकायाध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार राय ने कहा कि आर्थिक न्याय की संकल्पना के निहितार्थ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

प्रत्येक व्यक्ति के पास उसके गरिमा के अनुरूप इतना आर्थिक संशाधन अवश्य होना चाहिए जिससे वह अपना जीवन गरिमापूर्ण ढंग से व्यतीत कर सके। यद्यपि गरिमापूर्ण जीवन को परिभाषित करना कठिन है,फिर भी इसके अंतर्गत मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति सहज ढंग से किया जाना समिलित है। कार्यक्रम में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ0 अजय कुमार सिंह ने कि कहा कि न्याय शब्द का तात्पर्य समान एवं निष्पक्ष व्यवस्था है, इसके अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति के पास आय के पर्याप्त साधन उपलब्ध होने चाहिए, यह राज्य के साथ- साथ समाज का भी कर्तव्य है कि लोगों के मध्य व्याप्त आय की असमानता को कम करने की दिशा में कार्य करें। आजादी के सात दशक व्यतीत हो जाने के बावजूद आय की असमानता सर्वत्र देखने को मिल रही है। फिर भी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम में स्थितिया सुधर रही है। कार्यक्रम में डॉ० शशि कुमार डॉ० सन्तोष कुमार डॉ0 विवेक डॉ० वन्दना गुप्ता दिलीप शुक्ला सहित अन्य विद्यार्थी मौजूद रहे।

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