एमएसडीयू में ‘श्री अन्न शक्ति’ 10-दिवसीय कौशल विकास एवं उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ

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एमएसडीयू में ‘श्री अन्न शक्ति’ 10-दिवसीय कौशल विकास एवं उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ
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आजमगढ़, 31 जुलाई। महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय (एमएसडीयू), आजमगढ़ के गृह विज्ञान विभाग एवं खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘श्री अन्न शक्ति’ 10-दिवसीय कौशल विकास एवं उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार द्वारा किया गया। अंतरराष्ट्रीय श्री अन्न वर्ष-2023 एवं दीक्षोत्सव-2026 के अंतर्गत आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 30 जुलाई से 8 अगस्त, 2026 तक संचालित होगा। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को श्री अन्न (मिलेट्स) आधारित मूल्य संवर्धित खाद्य उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं विपणन का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर एवं सफल उद्यमी बनाना है।

कार्यक्रम के शुभारम्भ अवसर पर माननीय कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने सभी प्रशिक्षणार्थी महिलाओं को प्रशिक्षण किट वितरित की। इस किट में प्रशिक्षण के दौरान उपयोग में आने वाली आवश्यक सामग्री, जैसे एप्रन, हेड कैप, हैंड ग्लव्स, सैनिटाइज़र, नोटबुक, पेन, प्रशिक्षण पुस्तिका (Instruction Sheet), रेसिपी शीट, लेखन सामग्री, आईडी कार्ड, फोल्डर तथा अन्य आवश्यक प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई गई। उन्होंने कहा कि किसी भी कौशल प्रशिक्षण की सफलता केवल सैद्धांतिक ज्ञान से नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभव एवं गुणवत्तापूर्ण संसाधनों से सुनिश्चित होती है। इसी उद्देश्य से प्रत्येक प्रतिभागी को प्रशिक्षण किट उपलब्ध कराई गई है, ताकि वे प्रशिक्षण के प्रत्येक चरण में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए भविष्य में स्वयं का उद्यम स्थापित करने के लिए सक्षम बन सकें।

अपने संबोधन में माननीय कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि श्री अन्न केवल एक खाद्यान्न नहीं, बल्कि संतुलित पोषण, बेहतर स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त आधार है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए पौष्टिक एवं प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। विश्वविद्यालय का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल उत्पाद निर्माण या विपणन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को पोषण के प्रति जागरूक करने तथा स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

उन्होंने कहा कि श्री अन्न हमारी पारंपरिक खाद्य संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो समय के साथ हमारी भोजन की थाली से लगभग गायब हो गई। आज जब कुपोषण, एनीमिया, मधुमेह, मोटापा एवं अन्य जीवनशैली संबंधी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं, तब श्री अन्न को पुनः जन-जन तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल मिलेट्स उत्पादों का निर्माण एवं विपणन करना नहीं, बल्कि समाज को ऐसे पौष्टिक खाद्य विकल्प उपलब्ध कराना है, जो स्वाद के साथ-साथ बेहतर स्वास्थ्य और संतुलित पोषण भी सुनिश्चित करें।

उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल, नवाचार एवं उद्यमिता को समाज से जोड़ना है। ‘श्री अन्न शक्ति’ केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं को ‘सीखो–बनाओ–ब्रांड बनाओ–बाज़ार से जुड़ो–आत्मनिर्भर बनो’ की संपूर्ण प्रक्रिया से जोड़ने का प्रयास है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागी न केवल पौष्टिक मिलेट्स आधारित उत्पाद तैयार करना सीखेंगी, बल्कि स्वयं का सफल उद्यम स्थापित कर अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनेंगी।

कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. उदय प्रताप सिंह एवं डॉ. आकांक्षा पाण्डेय ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रतिभागियों को रागी एवं बाजरा आधारित लड्डू, बिस्कुट तथा अन्य मूल्य संवर्धित उत्पादों के वैज्ञानिक निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण, आधुनिक पैकेजिंग, ब्रांडिंग, लेबलिंग एवं विपणन की तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को यह भी समझाया जाएगा कि रागी, बाजरा एवं अन्य श्री अन्न प्राकृतिक रूप से फाइबर, कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन तथा अनेक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो शरीर की पोषण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में तैयार किए जा रहे मिलेट्स आधारित उत्पादों की विशेषता यह है कि इनमें रिफाइंड चीनी के स्थान पर गुड़, वनस्पति घी के स्थान पर शुद्ध देशी घी तथा सूखे मेवों एवं अन्य पौष्टिक सामग्री का उपयोग किया जाता है। इन उत्पादों के निर्माण में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि किसी भी महत्वपूर्ण पोषक तत्व की अनदेखी न हो तथा प्रत्येक उत्पाद स्वादिष्ट होने के साथ-साथ अधिकतम पोषण प्रदान करने वाला हो। इस प्रकार विश्वविद्यालय का प्रयास बाजार में उपलब्ध सामान्य उत्पादों की तुलना में अधिक पौष्टिक, सुरक्षित एवं स्वास्थ्यवर्धक विकल्प तैयार करना है।

उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल उत्पाद तैयार करना या उनका विपणन करना नहीं, बल्कि ‘पोषण के साथ उद्यमिता’ की अवधारणा को बढ़ावा देना है। प्रशिक्षणार्थियों को यह सिखाया जा रहा है कि किस प्रकार वैज्ञानिक विधियों एवं गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल का उपयोग करके ऐसे उत्पाद विकसित किए जाएँ, जो लोगों के स्वास्थ्य में सकारात्मक योगदान दें। साथ ही उन्हें पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन, उद्यम स्थापना तथा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार के अवसरों से भी जोड़ने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इस अवसर पर आयोजन समिति की सदस्य डॉ. सपना त्रिपाठी, डॉ. पूजा वर्मा एवं डॉ. ऋचा सिंह सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल समापन पर सभी प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। यह प्रमाण-पत्र न केवल उनके द्वारा अर्जित कौशल एवं प्रशिक्षण का प्रमाण होगा, बल्कि उन्हें स्वरोजगार, स्वयं सहायता समूहों, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों तथा मिलेट्स आधारित खाद्य प्रसंस्करण एवं उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित एवं सशक्त करेगा। साथ ही यह प्रमाण-पत्र उनके कौशल विकास की औपचारिक मान्यता प्रदान करेगा, जिससे भविष्य में विभिन्न प्रशिक्षण, उद्यमिता एवं आजीविका से जुड़े अवसरों का लाभ उठाने में उन्हें सहायता मिलेगी।

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