भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ में “द फ्यूचर ऑफ साइबर सिक्योरिटी” पर एकदिवसीय कार्यशाला एवं बी.टेक (साइबर सिक्योरिटी) सत्र 2026 का शुभारंभ

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भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ में “द फ्यूचर ऑफ साइबर सिक्योरिटी” पर एकदिवसीय कार्यशाला एवं बी.टेक (साइबर सिक्योरिटी) सत्र 2026 का शुभारंभ
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ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग द्वारा Combat Cyber Shield के सहयोग से “द फ्यूचर ऑफ साइबर सिक्योरिटी” विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला एवं बी.टेक (सीएसई) साइबर सिक्योरिटी सत्र 2026 का शुभारंभ समारोह विश्वविद्यालय के अटल हॉल में गरिमामय वातावरण में आयोजित वहीं, मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अरुण मोहन शैरी (निदेशक, आईआईआईटी लखनऊ) ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के पारंपरिक स्वागत, तिलक, दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। विश्वविद्यालय कुलगीत की प्रस्तुति के पश्चात अतिथियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने साइबर सुरक्षा के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में यह केवल एक तकनीकी आवश्यकता नहीं, बल्कि एक सशक्त “डिजिटल इम्यून सिस्टम” है, जो समाज, संस्थानों और व्यक्तिगत जीवन को अदृश्य साइबर खतरों से सुरक्षित रखता है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हमारी निर्भरता डिजिटल माध्यमों पर बढ़ रही है, वैसे-वैसे साइबर खतरों की जटिलता भी बढ़ती जा रही है, ऐसे में जागरूकता और कौशल दोनों अत्यंत आवश्यक हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नैतिकता, जिम्मेदारी और सतर्कता का भी समान महत्व है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल तकनीक के उपयोगकर्ता न बनें, बल्कि सुरक्षित एवं जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनें। कुलपति महोदय ने यह भी उल्लेख किया कि वैश्विक स्तर पर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे यह क्षेत्र युवाओं के लिए व्यापक संभावनाओं और रोजगार के अवसरों से परिपूर्ण है।

उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक पहल का उल्लेख करते हुए बताया कि संस्थान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, डेटा एनालिटिक्स एवं भाषा प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों को पाठ्यक्रम में शामिल कर विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि तकनीकी ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों का समावेश ही वास्तविक शिक्षा का आधार है।

वहीं मुख्य वक्ता डॉ. रक्षित टंडन ने अपने व्याख्यान में साइबर सुरक्षा के समकालीन परिदृश्य को सरल एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर हमले केवल तकनीकी कमजोरियों के कारण नहीं, बल्कि मानवीय असावधानी के कारण भी होते हैं। उन्होंने फिशिंग, रैनसमवेयर, सोशल इंजीनियरिंग एवं डेटा ब्रीच जैसे प्रमुख साइबर खतरों का उल्लेख करते हुए उनके वास्तविक उदाहरण प्रस्तुत किए।

उन्होंने विद्यार्थियों को जागरूक करते हुए कहा कि “साइबर अपराधी तकनीक से अधिक हमारी लापरवाही का लाभ उठाते हैं,” इसलिए डिजिटल सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के लिए मजबूत पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, संदिग्ध लिंक से बचाव तथा व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण उपाय सुझाए। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग जैसी तकनीकें साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, लेकिन इनके दुरुपयोग की संभावनाओं के प्रति सजग रहना भी आवश्यक है।

वहीं विद्यार्थियों को विकसित भारत एवं अग्रसर भारत के प्रति उनके योगदान को याद दिलाते हुए श्री घनश्याम शाही, अभाविप, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री ने साइबर सिक्योरी को सभी विद्यार्थियों को जीवन में आत्म सात करने को कहा।

कार्यक्रम में डॉ नलिनी मिश्रा द्वारा उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस पर केंद्रित पुस्तक “हमारी संस्कृति हमारी पहचान” का विमोचन भी किया गया तथा उन्होंने अपने संबोधन में साइबर सुरक्षा को वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता बताते हुए युवाओं को इस क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का समापन प्रो. चंदना डे द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, कर्मचारियों, मीडिया प्रतिनिधियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बी.टेक (साइबर सिक्योरिटी) पाठ्यक्रम के शुभारंभ को विश्वविद्यालय की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ। तत्पश्चात अतिथियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रयोगशाला का अवलोकन किया एवं कुलपति महोदय के साथ संवाद किया।

यह कार्यशाला प्रतिभागियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुई, जिसमें साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में जागरूकता, नवाचार एवं कौशल विकास को विशेष महत्व प्रदान किया गया।

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