भाषा विश्वविद्यालय की 41वीं कार्य परिषद की बैठक सम्पन्न, कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मिली मंजूरी

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भाषा विश्वविद्यालय की 41वीं कार्य परिषद की बैठक सम्पन्न, कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मिली मंजूरी
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ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ की 41वीं कार्य परिषद की बैठक शुक्रवार को अपराह्न 4:00 बजे कुलपति प्रो अजय तनेजा की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय परिसर में सम्पन्न हुई। बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक, शोध एवं विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया तथा विभिन्न प्रस्तावों को सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान की गई।

बैठक में विश्वविद्यालय की वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं से संबंधित प्रस्तावों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए गए। कार्य परिषद ने विश्वविद्यालय के प्रस्तावित खेल परिसर का नाम “मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स” रखने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की। कार्यपरिषद द्वारा विश्वविद्यालय के शिक्षकों की वरिष्ठता (सीनियरिटी) सूची को भी अनुमोदित किया गया। इसके साथ ही 11वें दीक्षांत समारोह के लिए मेडल और डिग्रियों के लिये अनुमोदन भी दिया गया.

कार्य परिषद द्वारा विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रशासनिक एवं शैक्षणिक पदों पर निम्नलिखित प्रभार स्वीकृत किए गए:-

प्रो. मसूद आलम को डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर (DSW) नियुक्त किया गया।

डॉ. पूनम चौधरी को डीन, सोशल साइंस का दायित्व सौंपा गया।

डॉ. मजहर ख़ालिक को एसोसिएट डीन, साइंस नियुक्त किया गया।

डॉ. राहुल मिश्रा को असिस्टेंट डीन, रिसर्च(इंचार्ज) का दायित्व प्रदान किया गया।

डॉ. रजा हैदरी को असिस्टेंट डीन, रिसर्च नियुक्त किया गया।

बैठक में विश्वविद्यालय की स्ववित्तपोषित योजना के अंतर्गत संविदा के आधार पर विभिन्न विभागों में शिक्षकों के चयन को भी स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अंतर्गत बायोटेक्नोलॉजी विभाग में डॉ. कमलेश सोनी एवं डॉ. दिलीप कुमार, प्राणी विज्ञान विभाग में डॉ. रत्नेश कुमार सिंह तथा माइक्रोबायोलॉजी विभाग में डॉ. शालिनी राय के चयन का अनुमोदन किया गया।

इसके अतिरिक्त बैठक में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान गतिविधियों, छात्र कल्याण तथा प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया तथा आवश्यक निर्णय लिए गए। कार्य परिषद में लिए गए निर्णयों से विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, छात्र कल्याण तथा संस्थागत विकास को नई गति मिलने की अपेक्षा व्यक्त की गई।

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