भाषा विश्वविद्यालय के ‘क्षितिज-5.0’ में सजे शब्दों के रंग, विद्यार्थियों ने विचारों और कविताओं से बांधा समां

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भाषा विश्वविद्यालय के ‘क्षितिज-5.0’ में सजे शब्दों के रंग, विद्यार्थियों ने विचारों और कविताओं से बांधा समां
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ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय की अवधी शोधपीठ एवं काव्योम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी दिवस पखवाड़ा के अवसर पर ‘क्षितिज-5.0’ सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन कुलपति प्रो अजय तनेजा के सरंक्षण में किया गया। उत्सव के अंतर्गत वाद-विवाद, निबंध लेखन एवं स्वरचित काव्य पाठ प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए अपने रचनात्मक कौशल और वैचारिक क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

निबंध लेखन प्रतियोगिता का विषय ‘आधुनिकता का संस्कृति पर प्रभाव’ तथा वाद-विवाद प्रतियोगिता का विषय ‘क्या वर्तमान समय में ऑनलाइन शिक्षा एक उपयुक्त साधन है?’ रखा गया। दोनों विषयों पर प्रतिभागियों ने समसामयिक संदर्भों से जुड़े क्रांतिकारी, तार्किक एवं रचनाधर्मी विचार प्रस्तुत किए। वहीं, स्वरचित काव्य पाठ के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी साहित्यिक संवेदना, कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति क्षमता का परिचय दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अवधी शोधपीठ के समन्वयक एवं विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डॉ. नीरज शुक्ल ने की, जबकि कार्यक्रम का समन्वय अवधी शोधपीठ के सह-समन्वयक डॉ. योगेन्द्र कुमार सिंह द्वारा किया गया।

इस अवसर पर डॉ. नीरज शुक्ल ने कविता की प्रासंगिकता एवं साहित्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साहित्य समाज की संवेदनाओं, विचारों और समय के बदलावों को अभिव्यक्ति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिताओं के विषय वर्तमान समय की चुनौतियों और आवश्यकताओं के अनुरूप हैं तथा ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सामाजिक सरोकार की भावना को मजबूत करते हैं।प्रतियोगिताओं के निर्णायक मंडल में हिंदी विभाग की डॉ. आराधना अस्थाना, कॉमर्स विभाग की डॉ. पूजा मिश्र, राजनीति शास्त्र विभाग के डॉ. मृणाल झा एवं डॉ. प्रशांत सिंह शामिल रहे। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का विषयवस्तु, तर्क, अभिव्यक्ति, मौलिकता एवं प्रस्तुतीकरण के विभिन्न मानकों पर मूल्यांकन किया।काव्योम फाउंडेशन की ओर से सह-सचिव प्रशांत प्रखर उपस्थित रहे। कार्यक्रम की तस्वीरें एवं रिकॉर्डिंग दीपक विश्वकर्मा ने संभाली, जबकि प्रतियोगियों के बीच समन्वय का दायित्व सत्यांशी पाण्डेय ने निभाया। कार्यक्रम का संचालन सत्यदेव सिंह द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन संकाय के अध्यक्ष डॉ. पीयूष कुमार त्रिवेदी सहित डॉ. अनुभव तिवारी, डॉ. प्रिया देवी, डॉ. आफरीन, डॉ. उमाकांत, डॉ. चेतना शर्मा, डॉ. आदेश पटेल एवं डॉ. अंशुल पाण्डेय उपस्थित रहे। विशेष आमंत्रित अतिथियों के रूप में डॉ. शोभित मिश्र एवं राजकुमार चौरसिया सहित शोधार्थी एवं अन्य विद्वान भी मौजूद रहे।

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