सी.वी. रमन अनुसंधान अनुदान योजना के तहत 60 शोध परियोजनाओं को मिली स्वीकृति
कानपुर। विश्वविख्यात नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर वेंकट रमन के नाम पर संचालित सी.वी. रमन अनुसंधान अनुदान योजना के अंतर्गत छत्रपति...
कानपुर। विश्वविख्यात नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर वेंकट रमन के नाम पर संचालित सी.वी. रमन अनुसंधान अनुदान योजना के अंतर्गत छत्रपति...
कानपुर। विश्वविख्यात नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर वेंकट रमन के नाम पर संचालित सी.वी. रमन अनुसंधान अनुदान योजना के अंतर्गत छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर में चयनित शोध परियोजनाओं की घोषणा विश्वविद्यालय के 61वें स्थापना दिवस के अवसर पर की जाएगी। यह योजना विश्वविद्यालय में अनुसंधान, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।
बहु-स्तरीय मूल्यांकन के बाद हुआ चयन:
कुलपति के दूरदर्शी नेतृत्व में संचालित इस योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2025–26 के लिए प्राप्त लगभग 150 शोध प्रस्तावों का गहन और पारदर्शी मूल्यांकन किया गया। चयन प्रक्रिया तीन चरणों—तकनीकी मूल्यांकन–I, तकनीकी मूल्यांकन–II तथा तीन बाह्य विशेषज्ञों द्वारा स्वतंत्र समीक्षा—के माध्यम से संपन्न हुई, जिसके पश्चात अंतिम परिणाम घोषित किए गए।
मेजर, माइनर और सीड ग्रांट में मिला अनुदान:
मूल्यांकन के उपरांत योग्य शोध परियोजनाओं को सी.वी. रमन मेजर, माइनर और सीड ग्रांट श्रेणियों में वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इस वर्ष कुल लगभग 60 शोध परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। इनमें विश्वविद्यालय के विभिन्न स्कूलों के साथ-साथ संबद्ध महाविद्यालयों की परियोजनाएं भी शामिल हैं। विशेष रूप से 23 अनुदान संबद्ध महाविद्यालयों को प्रदान किए गए हैं।
प्रारंभिक शोध को बढ़ावा देने पर विशेष जोर:
प्रारंभिक अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दी जाने वाली सीड ग्रांट श्रेणी के अंतर्गत इस बार विश्वविद्यालय के 10 स्कूलों को अनुदान स्वीकृत किया गया है। चयनित परियोजनाओं से अपेक्षा की गई है कि वे एनआईआरएफ रैंकिंग में मान्य शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन, पेटेंट एवं बौद्धिक संपदा, प्रूफ-ऑफ-कांसेप्ट, पायलट डाटा विकास तथा छात्रों व नवोदित शोधार्थियों के क्षमता निर्माण जैसे ठोस और मापनीय अकादमिक परिणाम प्रस्तुत करें।
एक वर्ष बाद होगी प्रगति की समीक्षा:
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, सभी स्वीकृत परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा एक वर्ष पश्चात परियोजना निगरानी समिति (PMC) द्वारा की जाएगी, जिसमें निर्धारित लक्ष्यों और उपलब्धियों का विस्तृत आकलन किया जाएगा।
अनुसंधान संस्कृति को मिलेगा नया बल:
इस अवसर पर विश्वविद्यालय प्रशासन एवं प्रोजेक्ट सेल ने सभी चयनित शोधकर्ताओं को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह योजना गुणवत्तापूर्ण, समाजोपयोगी और नवाचारी अनुसंधान संस्कृति को सशक्त बनाएगी। साथ ही, इससे छात्रों और युवा शोधकर्ताओं को अनुसंधान के क्षेत्र में सक्रिय सहभागिता और सीखने के नए अवसर प्राप्त होंगे।





