बौद्ध पर्यटन से विश्व को मिल रहा शांति और करुणा का संदेश, भारत बन रहा वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र

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बौद्ध पर्यटन से विश्व को मिल रहा शांति और करुणा का संदेश, भारत बन रहा वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र
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आजमगढ़। महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ के आतिथ्य एवं पर्यटन विभाग द्वारा बौद्ध पर्यटन विषय पर एक दिवसीय विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नव नालंदा महाविहार विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अबिनाश कुमार झा ने कहा कि भगवान बुद्ध द्वारा प्रतिपादित शांति, अहिंसा और करुणा के सिद्धांत आज भी विश्व के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं और उनसे जुड़े स्थलों की ओर देश-विदेश, विशेषकर दक्षिण एशियाई देशों के श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों का रुझान निरंतर बढ़ रहा है।

डॉ. झा ने अपने व्याख्यान में कहा कि इसी बढ़ते रुझान के परिणामस्वरूप बौद्ध पर्यटन (Buddhist Tourism) भारत के लिए न केवल एक धार्मिक गतिविधि के रूप में, बल्कि एक सशक्त सांस्कृतिक, शैक्षणिक और आर्थिक क्षेत्र के रूप में उभर कर सामने आया है। उन्होंने बताया कि बौद्ध पर्यटन के अंतर्गत भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े प्रमुख स्थलों—जन्म, ज्ञान प्राप्ति, प्रथम उपदेश और महापरिनिर्वाण—से संबंधित क्षेत्रों की यात्रा की जाती है।उन्होंने बताया कि बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, राजगीर, वैशाली और संकिसा जैसे ऐतिहासिक स्थल बौद्ध पर्यटन के प्रमुख केंद्र हैं, जहां प्रत्येक वर्ष एशिया के विभिन्न देशों के साथ-साथ यूरोप और अमेरिका से भी बड़ी संख्या में पर्यटक एवं बौद्ध अनुयायी पहुंचते हैं। इन स्थलों का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व भारत को वैश्विक स्तर पर एक विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।

वक्ता ने कहा कि वर्तमान समय में बौद्ध पर्यटन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह आध्यात्मिक शांति, ध्यान, योग, अध्ययन और सांस्कृतिक संवाद का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है। विदेशी पर्यटक भारत को भगवान बुद्ध की कर्मभूमि मानते हुए यहां की प्राचीन विरासत, जीवन दर्शन और शांत वातावरण से गहरा जुड़ाव महसूस करते हैं।

व्याख्यान में यह भी जानकारी दी गई कि बौद्ध पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारें निरंतर प्रयास कर रही हैं। बौद्ध सर्किट परियोजना के अंतर्गत आधारभूत संरचनाओं के विकास, सड़क एवं हवाई संपर्क, आधुनिक पर्यटन सुविधाओं तथा अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार को बौद्ध पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

डॉ. झा ने कहा कि बौद्ध पर्यटन के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। होटल उद्योग, परिवहन सेवाएं, हस्तशिल्प, टूर गाइड और अन्य सहायक गतिविधियों को इससे प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही यह भारत की सॉफ्ट पावर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और अधिक सशक्त बना रहा है।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब विश्व तनाव, संघर्ष और असहिष्णुता के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में बौद्ध पर्यटन मानवता को शांति, सह-अस्तित्व और करुणा का संदेश देने का सशक्त माध्यम बन रहा है। यह न केवल भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की आध्यात्मिक पहचान को भी मजबूत करता है।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में आतिथ्य एवं पर्यटन विभाग के प्रभारी डॉ. हिमांशु शेखर एवं डॉ. वंदना गिरि का सहयोग सराहनीय रहा। इस अवसर पर डॉ. अबिनाश कुमार झा ने विभाग के विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट, सर्वे रिपोर्ट एवं शोध प्रबंध निर्माण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी कक्षा में साझा कीं, जिससे विद्यार्थियों को अकादमिक एवं व्यावहारिक दृष्टि से लाभ मिला |




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