गांधी के विचार आज भी समाज में नैतिक संतुलन स्थापित करने की क्षमता रखते हैं: प्रो. सौबान सईद
लखनऊ, 30 जनवरी 2026: ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविधालय के उर्दू विभाग की साहित्यिक संस्था बज़्म-ए-अदब के तत्वावधान में शहीद दिवस के अवसर पर...

लखनऊ, 30 जनवरी 2026: ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविधालय के उर्दू विभाग की साहित्यिक संस्था बज़्म-ए-अदब के तत्वावधान में शहीद दिवस के अवसर पर...
लखनऊ, 30 जनवरी 2026: ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविधालय के उर्दू विभाग की साहित्यिक संस्था बज़्म-ए-अदब के तत्वावधान में शहीद दिवस के अवसर पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से “महात्मा गांधी: जीवन और विचार” विषय पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बज़्म-ए-अदब की अध्यक्ष रशीदा खातून ने अपने परिचयात्मक वक्तव्य में कहा कि वर्तमान समय में, जब समाज वैचारिक विघटन और आपसी दूरी का शिकार होता जा रहा है, महात्मा गांधी के जीवन, उनके विचारों और उनके अहिंसा के सिद्धांत का गंभीर अध्ययन अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि गांधी जी की शिक्षाएँ आज भी एकता, सहिष्णुता और आपसी सौहार्द को बढ़ावा देने में प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं तथा युवा पीढ़ी को उनके विचारों से परिचित कराना समय की अहम आवश्यकता है।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की अध्यक्षता उर्दू विभाग के वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित प्राध्यापक प्रोफेसर सौबान सईद ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने महात्मा गांधी के जीवन और विचारों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि गांधी जी केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नेता ही नहीं थे, बल्कि वे एक समग्र नैतिक और बौद्धिक व्यवस्था के प्रवर्तक भी थे। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन सादगी, सत्य और अहिंसा की व्यावहारिक व्याख्या है जिसमें व्यक्तिगत चरित्र और सामूहिक उत्तरदायित्व के बीच गहरा संबंध दिखाई देता है।
प्रो. सौबान सईद के अनुसार गांधी के विचार आज के भौतिकतावादी और विघटनग्रस्त समाज में नैतिक संतुलन स्थापित करने की पूर्ण क्षमता रखते हैं। उन्होंने आगे कहा कि गांधी जी की अहिंसा की अवधारणा मात्र एक राजनीतिक रणनीति नहीं, बल्कि एक व्यापक मानवीय दर्शन है, जो मनुष्य को मनुष्य के निकट लाता है और समाज में शांति, सहनशीलता तथा आपसी सम्मान को बढ़ावा देता है। उनका कहना था कि यदि हम गांधी के विचारों को केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने व्यवहारिक जीवन का हिस्सा बनाएं, तो समाज में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन संभव है। प्रोफेसर सौबान सईद ने महात्मा गांधी की व्यक्तित्व-गरिमा और उर्दू साहित्य के आपसी संबंध पर चर्चा करते हुए कहा कि गांधी जी का व्यक्तित्व इतना व्यापक, बहुआयामी और आकर्षक था कि उर्दू के कवि और लेखक उसके प्रभाव से अछूते नहीं रह सके। उनके अनुसार गांधी जी के विचार—विशेषकर अहिंसा, सत्य, मानवता और सामाजिक न्याय—उर्दू साहित्य में विभिन्न काव्यात्मक और गद्यात्मक रूपों में अभिव्यक्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि उर्दू कविता में गांधी जी को केवल एक राजनीतिक नेता के रूप में नहीं, बल्कि एक नैतिक और बौद्धिक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जबकि उर्दू गद्य में उनके संघर्ष, सिद्धांतों और उनके सरल किंतु गरिमामय जीवन को वैचारिक मार्गदर्शन का स्रोत माना गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गांधी जी के सर्वांगीण व्यक्तित्व ने उर्दू साहित्य को वैचारिक विस्तार प्रदान किया और उसमें मानवीय मूल्यों की चेतना को और अधिक सुदृढ़ किया।
इस अवसर पर उर्दू विभाग की दीवार पत्रिका बज़्म-ए-अदब के “गांधी विशेषांक” का भी विमोचन किया गया। महात्मा गांधी तथा उनके जीवन और विचारों को आधार बनाकर अर्सला अबरार (शोधार्थी), सनबल फातिमा (शोधार्थी), ज़ीबा जलील (शोधार्थी), मोहम्मद अल्तमश (शोधार्थी) और रशीदा खातून ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। हसन अकबर (शोधार्थी) ने भजन एवं ग़ज़ल प्रस्तुत की। इसके अतिरिक्त अब्दुल क़ादिर, निदा परवीन (एम.ए.), राफ़िया खातून (एम.ए.), आमना खातून (एम.ए.), सामिया सदफ़ (बी.ए.) और महक परवीन (बी.ए.) ने ग़ज़लों का पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन रशीदा खातून (शोधार्थी) ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन एम. ऐमन द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर प्रोफेसर फ़ख़्र आलम, डॉ. मोहम्मद अकमल, डॉ. मोहम्मद आज़म अंसारी, डॉ. ज़फ़रुन नक़ी, डॉ. मुनव्वर हुसैन, डॉ. मूसा रज़ा और डॉ. सिद्धार्थ सुदीप सहित अनेक शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।





