क्लीनिकल एवं लीगल स्टडीज के अंतर्गत विधि विभाग के विद्यार्थियों का ग्रामीण क्षेत्रों में विधिक जागरूकता एवं अध्ययन भ्रमण
आज़मगढ़, महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, आज़मगढ़ के विधि विभाग द्वारा क्लीनिकल एवं लीगल स्टडीज विषय के अंतर्गत विद्यार्थियों को व्यावहारिक विधिक...

आज़मगढ़, महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, आज़मगढ़ के विधि विभाग द्वारा क्लीनिकल एवं लीगल स्टडीज विषय के अंतर्गत विद्यार्थियों को व्यावहारिक विधिक...
आज़मगढ़, महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, आज़मगढ़ के विधि विभाग द्वारा क्लीनिकल एवं लीगल स्टडीज विषय के अंतर्गत विद्यार्थियों को व्यावहारिक विधिक ज्ञान से सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक अध्ययन भ्रमण का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत एल.एल.एम. द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए समेन्दा, सीही एवं महरुपुर गाँवों का भ्रमण किया।
इस शैक्षणिक भ्रमण का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को न्याय तक पहुँच, विधिक सहायता, ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यमान सामाजिक-विधिक समस्याओं तथा उनके समाधान की व्यवहारिक समझ प्रदान करना था। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने ग्रामीण जनजीवन से जुड़ी विधिक चुनौतियों, अधिकारों एवं सरकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति को निकट से देखा और समझा।
भ्रमण के क्रम में विद्यार्थियों ने ग्रामीण नागरिकों से संवाद स्थापित कर उनकी विधिक समस्याओं को जाना तथा यह समझने का प्रयास किया कि विधिक सहायता तंत्र किस प्रकार जमीनी स्तर पर कार्य करता है। इस अनुभव से विद्यार्थियों को कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान और व्यवहारिक वास्तविकताओं के बीच के अंतर को समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में विधि के विद्यार्थियों ने सहभागिता की। भ्रमण के समापन अवसर पर विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस प्रकार के अध्ययन भ्रमण से विधिक शिक्षा अधिक प्रभावी, संवेदनशील एवं समाजोपयोगी बनती है। विद्यार्थियों के अनुसार यह शैक्षणिक यात्रा न केवल ज्ञानवर्धक रही, बल्कि भविष्य में विधिक सेवा के क्षेत्र में कार्य करने हेतु उन्हें प्रेरणा भी प्रदान करती है।
विधि विभाग की ओर से इस कार्यक्रम का सफल समन्वयन डॉ. आर. डी. सोनकर, आदर्श मिश्र एवं गजाला फ़िरदौस द्वारा किया गया। कार्यक्रम के मीडिया समन्वयन में नितेश सिंह तथा डॉ.विजय प्रकाश उपाध्याय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर मनोविज्ञान के डॉ. परमानंद पाण्डेय का सहयोग भी विशेष रूप से सराहनीय रहा।





