बैठकों में प्रभावी संवाद पर महत्वपूर्ण शोध प्रकाशित
लखनऊ। ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की शिक्षिका डॉ. रुचिता सुजय चौधरी तथा छत्तीसगढ़ शासन के उच्च...
लखनऊ। ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की शिक्षिका डॉ. रुचिता सुजय चौधरी तथा छत्तीसगढ़ शासन के उच्च...
लखनऊ। ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की शिक्षिका डॉ. रुचिता सुजय चौधरी तथा छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग में संयुक्त निदेशक अरुण कुमार सिन्हा द्वारा संयुक्त रूप से किया गया एक महत्वपूर्ण शोध पत्र व्यावसायिक एवं सामाजिक बैठकों में अंतरव्यक्तीय संचार की भूमिका पर केंद्रित है। यह शोध International Journal of Media and Communication Research के वॉल्यूम 7, अंक 1 (2026) में प्रकाशित हुआ है।
उल्लेखनीय है कि यह जर्नल इंडोनेशिया के UIR प्रेस द्वारा प्रकाशित तथा Faculty of Communication Sciences, Universitas Islam Riau द्वारा प्रबंधित किया जाता है। जर्नल का उद्देश्य इंडोनेशिया सहित विश्वभर के शोधकर्ताओं और प्रैक्टिशनर्स को मानव, अनुप्रयुक्त तथा जनसंचार अध्ययन से जुड़े अनुभवजन्य शोध, वैचारिक एवं सैद्धांतिक विमर्श साझा करने का सशक्त मंच प्रदान करना है।
शोध में यह स्पष्ट किया गया है कि बैठकों की सफलता केवल औपचारिक प्रक्रियाओं या निर्धारित एजेंडे पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सक्रिय सुनवाई, सहानुभूति, गैर-मौखिक संप्रेषण और समान सहभागिता जैसे मानवीय तत्वों पर भी आधारित होती है। अध्ययन के अनुसार, जब प्रतिभागी एक-दूसरे को ध्यानपूर्वक सुनते हैं और सम्मानजनक संवाद बनाए रखते हैं, तो बैठकों में विश्वास, सहयोग तथा निर्णय-निर्माण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है।
अध्ययन के लिए मिश्रित शोध पद्धति अपनाई गई, जिसके अंतर्गत 120 प्रतिभागियों से सर्वेक्षण द्वारा आंकड़े एकत्र किए गए तथा 12 प्रतिभागियों के गहन साक्षात्कार लिए गए। विश्लेषण से यह निष्कर्ष सामने आया कि सक्रिय सुनवाई का बैठकों की प्रभावशीलता और प्रतिभागियों की संतुष्टि से सबसे मजबूत सकारात्मक संबंध है। साथ ही, आंखों का संपर्क, हाव-भाव और स्वर-लहजा जैसे गैर-मौखिक संकेत भी संवाद को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शोध में यह भी रेखांकित किया गया है कि सांस्कृतिक संदर्भ और पदानुक्रमीय संरचनाएं संवाद को प्रभावित करती हैं। कई स्थितियों में वरिष्ठता के कारण कनिष्ठ प्रतिभागी अपनी बात खुलकर नहीं रख पाते, जिससे संवाद की गुणवत्ता प्रभावित होती है। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि बैठकों के संचालकों को समावेशी और संवाद-मैत्रीपूर्ण वातावरण विकसित करना चाहिए, ताकि सभी प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने शोध की सराहना करते हुए कहा कि यह अध्ययन न केवल अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि प्रशासनिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक बैठकों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में व्यावहारिक मार्गदर्शन भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का शोध विश्वविद्यालय की शोध-परंपरा को सशक्त करता है और समाजोपयोगी ज्ञान के सृजन में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
यह शोध शिक्षकों, प्रशासकों, पेशेवरों तथा सामुदायिक नेतृत्व से जुड़े व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि यह बैठकों को अधिक मानवीय, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने के व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत करता है।
Professor Arun Kumar Sinha
Dr. Dr. Ruchita Sujai Chowdhary





