तृतीय लिंग की हाशिये से मुख्यधारा तक की यात्रा पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य समापन

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तृतीय लिंग की हाशिये से मुख्यधारा तक की यात्रा पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य समापन
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लखनऊ। ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार “फ्रॉम मार्जिन्स टू मेनस्ट्रीम: द जर्नी ऑफ थर्ड जेंडर” का समापन वैलेडिक्टरी सैरेमनी के साथ गरिमामयी वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह सेमिनार तृतीय लिंग की सामाजिक, विधिक, शैक्षणिक तथा नीतिगत यात्रा पर केंद्रित रहा। वैलेडिक्टरी सत्र अकादमिक भवन में आयोजित किया गया।

वैलेडिक्टरी सत्र की शुरुआत विभागाध्यक्ष एवं निदेशक डॉ. पियूष कुमार त्रिवेदी के स्वागत उद्बोधन से हुई। इसके पश्चात अतिथियों का पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ समावेशी एवं संवेदनशील समाज के निर्माण का संदेश दिया गया।

सेमिनार की संयोजक डॉ. श्वेता त्रिवेदी ने वैलेडिक्टरी सत्र में संक्षिप्त एवं सारगर्भित सेमिनार प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने दोनों दिनों में आयोजित सत्रों, प्रमुख विषय-वस्तुओं तथा उनसे प्राप्त निष्कर्षों को रेखांकित करते हुए बताया कि सेमिनार में तृतीय लिंग की पहचान, अधिकार, प्रतिनिधित्व, सामाजिक स्वीकृति तथा मुख्यधारा में समावेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर एवं सार्थक विमर्श हुआ। उन्होंने प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता और संवादात्मक सत्रों को सेमिनार की प्रमुख उपलब्धि बताया।

विशेष अतिथि के रूप में नाज़ फ़ाउंडेशन इंटरनेशनल, लखनऊ के निदेशक आरिफ़ ज़फ़र ने विशेष संबोधन दिया। उन्होंने संस्था के कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि नाज़ फ़ाउंडेशन इंटरनेशनल एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो उत्तर प्रदेश के विभिन्न ज़िलों में तृतीय लिंग समुदाय सहित अन्य हाशिए पर खड़े वर्गों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, एचआईवी/एड्स जागरूकता, ग्रामीण विकास, गरीबी उन्मूलन एवं कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। उन्होंने हाशिए पर पड़े समुदायों के सशक्तिकरण में गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका तथा सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए जमीनी स्तर पर सहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया।

विशेष अतिथि के रूप में राज्यसभा सचिवालय, संसद भवन, भारत के निदेशक श्री महेश तिवारी ने अपने संबोधन में संसद की विधायी प्रक्रिया, विधेयकों के प्रस्तुतीकरण एवं विमर्श की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार कानून निर्माण और संसदीय बहसें तृतीय लिंग सहित सभी वर्गों के अधिकारों को सुदृढ़ करने में सहायक होती हैं। उनका संबोधन अकादमिक अध्ययन को वास्तविक विधायी प्रक्रियाओं से जोड़ने वाला रहा।

मुख्य अतिथि के रूप में श्री बालकृष्ण एन. रंजन, एचजेएस, विशेष सचिव (विधि) एवं अपर विधायी एवं विनियामक कार्य, उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने संबोधन में तृतीय लिंग समुदाय से जुड़े विधिक एवं नीतिगत अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील प्रशासन, समावेशी नीतियाँ और प्रभावी क्रियान्वयन ही समाज के हाशिए पर खड़े समुदायों को समानता और गरिमा प्रदान कर सकते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि “फ्रॉम मार्जिन्स टू मेनस्ट्रीम” जैसे विषय आज के समय की आवश्यकता हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों को केवल ज्ञान के केंद्र नहीं, बल्कि ऐसे सशक्त मंच बताया जहाँ समानता, समावेशन और मानवीय गरिमा के मूल्यों का विकास होता है।

इसके पश्चात सेमिनार में सहभाग करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए तथा सम्मानित अतिथियों को स्मृति-चिह्न भेंट किए गए। कार्यक्रम का औपचारिक समापन श्री अंशुल पांडेय, सहायक प्रोफेसर, विधि अध्ययन संकाय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, आयोजकों एवं प्रतिभागियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। सेमिनार के रिपोटियर की भूमिका डॉ. रत्नेश के. सिंह, सहायक प्रोफेसर, प्राणीशास्त्र विभाग द्वारा निभाई गई। अंत में राष्ट्रगान के साथ वैलेडिक्टरी सत्र सम्पन्न हुआ।

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