डीपफेक से डिजिटल अरेस्ट के मामले बढ़े-गौरव ललित
कानपुर । डीपफेक से डिजिटल अरेस्ट के मामले बढ़े, जिससे लोगों की छवि खराब हो रही हैं,अब हम सबकों डिजिटल अरेस्ट से बचना होगा । यह सब बात शनिवार को...

कानपुर । डीपफेक से डिजिटल अरेस्ट के मामले बढ़े, जिससे लोगों की छवि खराब हो रही हैं,अब हम सबकों डिजिटल अरेस्ट से बचना होगा । यह सब बात शनिवार को...
कानपुर । डीपफेक से डिजिटल अरेस्ट के मामले बढ़े, जिससे लोगों की छवि खराब हो रही हैं,अब हम सबकों डिजिटल अरेस्ट से बचना होगा । यह सब बात शनिवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के 61वें स्थापना दिवस के अंर्तगत पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा एक विशेष व्याख्यान में मुख्य वक्ता प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के मुख्य उप-संपादक गौरव ललित ने कही । व्याख्यान का मुख्य विषय 'डिजिटल मीडिया में डीपफेक' (डीपफेक इन सोशल मीडिया) रहा। यह आयोजन विभाग के लेक्चर हॉल मे आयोजित हुआ । कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि 2026 के इस दौर में पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ी चुनौती सूचना की सत्यता को बनाए रखना है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के मुख्य उप-संपादक गौरव ललित ने अपने संबोधन में डीपफेक तकनीक की भयावहता और इसकी बारीकियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा, आज हम एक ऐसे युग में हैं जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) के माध्यम से किसी भी व्यक्ति का हूबहू डिजिटल अवतार तैयार किया जा सकता है। डीपफेक तकनीक ने यथार्थ और कल्पना के बीच की रेखा को इतना धुंधला कर दिया है कि अब सामान्य आँखों से सत्य और असत्य में भेद करना असंभव हो गया है। इसके साथ ही उन्होंने छात्रों को आगाह करते हुए कहा कि भविष्य में एपक फाइल न खोले औऱ किसी परिचित को साझा भी न करें । इसके साथ ही उन्होंने किसी सूचना,वीडियो,फोटों की प्रमाणिकता जानने के लिए टूल के बारे में भी विस्तार से बताया । और छात्रों से कहा कि किसी सूचना को बिना जांचे साझा भी न करें । और साइबर फ्रॉड से बचने के तरीके भी बताए ।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकेशन साझा न करें सोशल मीडिया में । उसके बाद कहा कि यदि एक पत्रकार एआई के एल्गोरिदम को नहीं समझता, तो वह अनजाने में डीपफेक प्रोपेगेंडा का हिस्सा बन सकता है। उन्होंने बताया कि कैसे सिंथेटिक मीडिया के जरिए चुनावों और सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश की जा सकती है। उन्होंने छात्रों को 'मेटाडेटा विश्लेषण' और 'पिक्सेल स्ट्रक्चर' की जांच करने के तकनीकी गुण सिखाए, ताकि वे किसी भी फोटो या वीडियो की प्रामाणिकता की जांच कर सकें।
इस आयोजन में विभाग के एलमुनाई शोधार्थी चेतन ने कहा कि वर्तमान में थीसिस में एआई का चलन बढ़ गया । जो शोध व नवाचार के क्षेत्र मंस नुकसान दायक है । इस अवसर पर पत्रकारिता एवं जनसंचार के विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने व्याख्यान की अध्यक्षता करते हुए कहा कि एआई के बाद सोचने की समझ हम सबकी कम हुई हैं । उन्होंने छात्रों से कहा कि लिखने और पढ़ने में एआई के प्रयोग से बचे । किसी जानकारी के लिए गूगल का प्रयोग करें । इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ शिक्षक डॉ.जीतेंद्र डबराल, डॉ.ओम शंकर गुप्त,डॉ.योगेंद्र पांण्डेय,डॉ.रश्मि गौतम,डॉ.हरिओम कुमार,प्रेम किशोर शुक्ल,सागर कनौजिया समेत काफी सख्यां में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे ।





