मातृभाषा हमारी पहचान और संवेदनाओं की आधारशिला : डॉ. आराधना अस्थाना
लखनऊ, 21 फरवरी 2026। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा एक...

लखनऊ, 21 फरवरी 2026। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा एक...
लखनऊ, 21 फरवरी 2026। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मुख्य वक्ता डॉ आराधना अस्थाना का प्रेरणादायी उद्बोधन रहा, जिसमें उन्होंने मातृभाषा के महत्व और उसके सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में डॉ. आराधना अस्थाना ने कहा कि मातृभाषा केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और पहचान की मूल आधारशिला है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को सबसे प्रभावी ढंग से अपनी मातृभाषा में ही अभिव्यक्त कर सकता है। मातृभाषा के संरक्षण और संवर्धन से न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहती है, बल्कि समाज में वैचारिक समृद्धि भी सुनिश्चित होती है।
उन्होंने विशेष रूप से पत्रकारिता के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह मातृभाषाओं को प्रोत्साहित करे और स्थानीय भाषाई विविधता को सशक्त मंच प्रदान करे। मातृभाषा में पत्रकारिता करने से समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी संवाद स्थापित किया जा सकता है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अन्य प्राध्यापकगण, जिनमें डॉ नसीब, डॉ काजिम रिजवी तथा डॉ विनय विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा ओपन माइक कार्यक्रम के अंतर्गत पत्रकारिता के परास्रानातक छात्र सलमान अंसारी मातृ भाषा के संरक्षण में योगदान पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। जिसकी सभी ने सराहना की।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच मातृभाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा भाषाई विविधता के संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना था। गोष्ठी में उपस्थित विद्यार्थियों ने भी सक्रिय सहभागिता करते हुए विषय से जुड़े अपने विचार व्यक्त किए।





