भाषा विश्वविद्यालय: एमएसएमई योजनाओं पर कार्यशाला का आयोजन, उद्यमिता के लिए विद्यार्थियों को किया प्रेरित
ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में 17 मार्च को ‘उद्यमी लॉन्चपैड’ पहल के अंतर्गत एमएसएमई योजनाओं पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया...
ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में 17 मार्च को ‘उद्यमी लॉन्चपैड’ पहल के अंतर्गत एमएसएमई योजनाओं पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया...
ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में 17 मार्च को ‘उद्यमी लॉन्चपैड’ पहल के अंतर्गत एमएसएमई योजनाओं पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व प्रोफेसर सैयद हैदर अली ने किया। कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ।
उद्घाटन सत्र में प्रोफेसर सैयद हैदर अली, जिला उद्योग केंद्र के सहायक आयुक्त श्री वी.डी. चौधरी, प्रथम सत्र के वक्ता श्री अमित अग्रवाल तथा बैंकिंग विशेषज्ञ श्री शम्मी भसीन मंच पर उपस्थित रहे।
प्रथम सत्र में श्री अमित अग्रवाल ने विभिन्न एमएसएमई योजनाओं के उद्देश्यों, लाभार्थियों एवं विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार की इन योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। उन्होंने मुख्यमंत्री युवा योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, पीएम फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज (PMFME) तथा क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) जैसी योजनाओं की जानकारी देते हुए इनके माध्यम से उपलब्ध वित्तीय सहायता, सब्सिडी एवं प्रशिक्षण के अवसरों को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने फूड प्रोसेसिंग एवं अन्य व्यवसायिक मॉडलों की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
द्वितीय सत्र दोपहर 2 बजे प्रारंभ हुआ, जिसमें लगभग 200 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस सत्र में फटाफट ईवी चार्जर्स के निदेशक श्री माधवेन्द्र पोरवाल ने ईवी चार्जिंग व्यवसाय के मॉडल, इसके इकोसिस्टम तथा चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने हेतु उपलब्ध सरकारी प्रोत्साहनों की जानकारी दी।
इसके अतिरिक्त, फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र के विशेषज्ञ श्री बालाजी ने इस क्षेत्र में उद्यम शुरू करने के लिए आवश्यक लागत, संसाधन एवं लाइसेंसिंग प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कच्चे माल की गुणवत्ता, उपयुक्त मशीनरी, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग के महत्व को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में संभावनाओं के प्रति जागरूक किया।
कार्यक्रम के समापन पर प्रोफेसर सैयद हैदर अली ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों के समग्र विकास में इस तरह की पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की निरंतरता पर बल दिया।
कार्यशाला का संचालन अमन कुमार द्वारा किया गया। कार्यक्रम में लगभग 200 विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही।





