डिजिटल संसाधन फ़ारसी व अरबी अनुवाद को अधिक प्रामाणिक बना रहे हैं: प्रो. सौबान सईद

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डिजिटल संसाधन फ़ारसी व अरबी अनुवाद को अधिक प्रामाणिक बना रहे हैं: प्रो. सौबान सईद
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लखनऊ, 17 अप्रैल 2026: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविधालय के फ़ारसी विभाग ने उर्दू विभाग के सहयोग से आज “फ़ारसी और अरबी अनुवाद के क्षेत्र में डिजिटल संसाधनों का महत्व” विषय पर एक महत्वपूर्ण विस्तार व्याख्यान का आयोजन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत फ़ारसी विभाग के इंचार्ज डॉ. आरिफ़ अब्बास ने की। उन्होंने मुख्य वक्ता, शिक्षकों और छात्रों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान समय ज्ञान और साहित्य की दुनिया में तीव्र डिजिटल परिवर्तन का युग है, जहाँ क्लासिकी भाषाओं के दुर्लभ ग्रंथ, पांडुलिपियाँ, शब्दकोश, तफ़सीर और अन्य विद्वतापूर्ण सामग्री को डिजिटल रूप में संरक्षित कर व्यापक स्तर पर सुलभ बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फ़ारसी और अरबी जैसी महान सांस्कृतिक और विद्वतापूर्ण भाषाओं के अनुवाद में डिजिटल संसाधन न केवल अनुवादकों को नई सुविधाएँ प्रदान कर रहे हैं, बल्कि शोध और तुलनात्मक अध्ययन के अनेक अवसर भी उपलब्ध करा रहे हैं। इन संसाधनों की सहायता से विभिन्न संस्करणों तक त्वरित पहुँच, शब्दावली के सटीक चयन, अर्थ की गहराई को समझने और सांस्कृतिक संदर्भों के सही संप्रेषण में उल्लेखनीय सुविधा हुई है।

विभागाध्यक्ष एवं डीन प्रो. सौबान सईद ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में शैक्षणिक, साहित्यिक और भाषाई संसाधनों के नए आयाम सामने आए हैं। फ़ारसी और अरबी के अनुवाद में डिजिटल साधनों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि पांडुलिपियाँ, दुर्लभ पुस्तकें, शब्दकोश, ऑडियो-विज़ुअल सामग्री, ऑनलाइन कॉर्पस और डिजिटल आर्काइव अनुवादकों के लिए अत्यंत मूल्यवान संपत्ति हैं, जो अनुवाद को अधिक प्रामाणिक, अर्थपूर्ण और समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप बनाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन अनुवाद और डिजिटल टूल्स की सहायता से फ़ारसी और अरबी ग्रंथों के अनुवाद में न केवल गति आई है, बल्कि अर्थ की गहराई और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को सुरक्षित रखने में भी मदद मिली है।

मुख्य वक्ता डॉ. अब्दुल हफ़ीज़, विभागाध्यक्ष (अरबी), ने अपने विस्तार व्याख्यान में विस्तार से बताया कि अनुवाद केवल शब्दों का परिवर्तन नहीं, बल्कि संस्कृति, इतिहास, संदर्भ और विचारधारा का संवेदनशील संप्रेषण है, जिसमें डिजिटल संसाधन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि आज अनुवादकों के पास डिजिटल शब्दकोश, समानांतर पाठ, ई-पांडुलिपियाँ, ऑनलाइन तफ़सीर, शोध डेटाबेस और भाषा सीखने वाले सॉफ़्टवेयर जैसे अनेक साधन उपलब्ध हैं, जो फ़ारसी और अरबी ग्रंथों के सटीक, मानक और सहज अनुवाद को संभव बनाते हैं।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. ज़फ़रुन नक़ी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अब्दुर्रहमान फ़लाही ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ. मोहम्मद अकमल, डॉ. मोहम्मद आज़म अंसारी, डॉ. मुरतज़ा अली अतहर, डॉ. मूसी रज़ा, डॉ. अख़लाक़ अहमद सहित अनेक शिक्षक एवं छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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