सीएसजेएमयू में “साइबर सुरक्षा, विधि एवं अभिशासन” पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू
कानपुर । छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज में “साइबर सुरक्षा, विधि एवं अभिशासन” विषय पर ...

कानपुर । छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज में “साइबर सुरक्षा, विधि एवं अभिशासन” विषय पर ...
कानपुर । छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज में “साइबर सुरक्षा, विधि एवं अभिशासन” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुक्रवार को शुरूआत हुई। कार्यक्रम का उद्घाटन तात्या टोपे सेनेट हॉल में दीप प्रज्वलन के साथ किया गया, जिसमें देश-विदेश के विधि विशेषज्ञ, शिक्षाविद और शोधार्थी मौजूद रहे ।
कार्यक्रम की संयोजक एवं विधि संकाय की निदेशक डॉ. स्मृति रॉय ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि तकनीक और विधि के समन्वय से ही सशक्त विधिक व्यवस्था संभव है और आज के समय में रियल टाइम लॉ मेकिंग की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। इसके बाद विभाग के सहायक निर्देशक डॉ. दिव्यांश शुक्ला ने विभाग की शैक्षणिक गतिविधियों और उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया। सम्मेलन के पहले दिन में 10 प्रमुख वक्ताओं ने साइबर सुरक्षा और कानून के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे। राजीव गांधी नेशनल साइबर लॉ सेंटर, एनएलआईयू भोपाल के प्रो. अतुल कुमार पांडेय ने कहा कि साइबर स्पेस लगातार विकसित हो रहा है, इसलिए विधि को भी तकनीक के अनुरूप लचीला बनाना होगा।
वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. पवन दुग्गल ने भारत में समर्पित साइबर सुरक्षा कानून की आवश्यकता पर जोर दिया। इस आयोजन में दिल्ली विश्वविद्यालय की डॉ. निवेदिता चौधरी ने साइबर सुरक्षा को संवैधानिक और सामाजिक चुनौती बताते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नियंत्रण के बीच संतुलन की बात कही। वहीं आईआईटी कानपुर के सी3आईहब से जुड़े डॉ. आनंद हांडा ने महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं की सुरक्षा में शोध और तकनीकी समाधान की भूमिका को रेखांकित किया।
अन्य वक्ताओं ने भी डिजिटल फॉरेंसिक, वैश्विक सहयोग, साइबर अपराध नियंत्रण और युवाओं में डिजिटल नैतिकता के विकास जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं का मानना रहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि नीति, कानून और समाज से जुड़ा व्यापक मुद्दा है। कार्यक्रम के दौरान प्रो. संदीप त्रिपाठी ने कहा कि विज्ञान एक दोधारी तलवार है, जिसके सही उपयोग के लिए प्रभावी कानून और शासन व्यवस्था आवश्यक है।
सम्मेलन के पहले दिन के अंत में उपस्थित विशेषज्ञों ने इस आयोजन को ज्ञान के आदान-प्रदान और वैश्विक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया। कार्यक्रम में संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।सह-संयोजक सुश्री विधि कटियार ने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजकों के अनुसार यह सम्मेलन साइबर सुरक्षा, विधि और अभिशासन के क्षेत्र में समकालीन चुनौतियों पर विमर्श का प्रभावी मंच बन रहा है।





