महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में ऊर्जा बचत एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर विशेष जन-जागरूकता अभियान शुरू
आजमगढ़। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऊर्जा बचत और संसाधनों के संयमित उपयोग की अपील के क्रम में महाराजा सुहेल देव यूनिवर्सिटी ने पर्यावरण...

आजमगढ़। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऊर्जा बचत और संसाधनों के संयमित उपयोग की अपील के क्रम में महाराजा सुहेल देव यूनिवर्सिटी ने पर्यावरण...
आजमगढ़। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऊर्जा बचत और संसाधनों के संयमित उपयोग की अपील के क्रम में महाराजा सुहेल देव यूनिवर्सिटी ने पर्यावरण संरक्षण एवं ऊर्जा बचत को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऊर्जा संरक्षण को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
विश्वविद्यालय के कुलपति संजीव कुमार ने सोमवार से शुक्रवार तक पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने तथा कार्यालय समय सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक निर्धारित करने के निर्देश जारी किए हैं। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य विद्युत एवं अन्य ऊर्जा संसाधनों की अधिकतम बचत कर राष्ट्रहित में योगदान देना बताया गया है।
विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी द्वारा जारी सूचना के अनुसार, कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने प्रशासनिक भवन स्थित अपने कार्यालय में अधिकारियों एवं विभिन्न विभागों के जिम्मेदार पदाधिकारियों की बैठक बुलाकर स्पष्ट निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय से जुड़े सभी कर्मचारी, शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं ऊर्जा संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनें तथा अपने दैनिक कार्यों में ऊर्जा बचत को प्राथमिकता दें।
बैठक को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि “जिस प्रकार बूंद-बूंद से सागर भरता है, उसी प्रकार यदि देश का प्रत्येक नागरिक प्रधानमंत्री की अपील पर आंशिक सहयोग भी करने लगे तो वह प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।”
उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार, विशेषकर महिलाओं एवं छात्राओं से कुछ समय तक सोने के आभूषणों की खरीद से परहेज कर राष्ट्रीय हित में संयम अपनाने का भी आह्वान किया। कुलपति ने इसे देश के प्रति जिम्मेदार नागरिक होने का परिचायक बताया।
कुलपति ने कुलसचिव डॉ. अंजनी कुमार मिश्रा को निर्देशित किया कि विश्वविद्यालय के सभी विभागाध्यक्षों, प्राध्यापकों एवं जिम्मेदार अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने हेतु निर्देश जारी किए जाएं कि अधिकतर सेमिनार, बैठकें एवं प्रशासनिक गतिविधियां वर्चुअल मोड में आयोजित की जाएं, जिससे अनावश्यक ऊर्जा खपत को कम किया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही विश्वविद्यालय परिसर में भौतिक उपस्थिति सुनिश्चित की जाए तथा यथासंभव इलेक्ट्रिक वाहनों अथवा साइकिल का प्रयोग किया जाए। मूल्यांकन कार्य में लगे शिक्षकों से भी ऊर्जा बचत अभियान में सक्रिय सहयोग देने की अपेक्षा व्यक्त की गई।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह पहल न केवल ऊर्जा संरक्षण की दिशा में सार्थक कदम सिद्ध होगी, बल्कि विद्यार्थियों और समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति सकारात्मक जागरूकता भी विकसित करेगी।





