सीयू पंजाब में सीयूपीआरडीएफ इन्क्यूबेटर और राइस स्ट्रॉ आधारित इको-फ्रेंडली टेबलवेयर निर्माण सुविधा शुरू

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सीयू पंजाब में सीयूपीआरडीएफ इन्क्यूबेटर और राइस स्ट्रॉ आधारित इको-फ्रेंडली टेबलवेयर निर्माण सुविधा शुरू
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बठिंडा, 26 मई 2026: पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने अपने नवाचार एवं उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा “निधि” योजना के अंतर्गत प्रायोजित इन्क्लूसिव टेक्नोलॉजी बिजनेस इन्क्यूबेटर (निधि-आईटीबीआई) — सीयूपी रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन (सीयूपीआरडीएफ) सुविधा का औपचारिक शुभारंभ किया। इसके साथ ही सीयूपीआरडीएफ में इन्क्यूबेट की गई धान की पराली से टिकाऊ डिस्पोजेबल टेबलवेयर तैयार करने वाली स्टार्टअप कंपनी मैसर्स ससपैक टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड की पायलट मैन्युफैक्चरिंग सुविधा का भी उद्घाटन किया गया।

उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि एवं आईआईटी रोपाड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा, सीयू पंजाब के कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी, सम कुलपति प्रो. किरण हजारिका, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के वैज्ञानिक-सी डॉ. सी.एस. यादव, कुलसचिव डॉ. विजय शर्मा तथा वित्त अधिकारी डॉ. राज कुमार शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि प्रो. राजीव आहूजा और कुलपति प्रो. राघवेंद्र पी. तिवारी ने बोर्ड सदस्यों, संकाय सदस्यों, शोधार्थियों, स्टार्टअप संस्थापकों, नवप्रवर्तकों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति में सीयूपीआरडीएफ पट्टिका का अनावरण भी किया।

गणमान्य अतिथियों ने बोर्ड सदस्यों, संकाय सदस्यों, शोधार्थियों, स्टार्टअप संस्थापकों, नवप्रवर्तकों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति में सुविधाओं के उद्घाटन पट्ट का अनावरण किया।

इस अवसर पर सीयूपी रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन की परियोजना निदेशक प्रो. (डॉ.) अंजना मुंशी तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अक्षय नाग ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सीयूपीआरडीएफ द्वारा विकसित सुविधाओं, गतिविधियों एवं नवाचार संबंधी पहलों की विस्तृत जानकारी दी। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की निधि (निधि) योजना के अंतर्गत स्थापित सीयूपीआरडीएफ का उद्देश्य तकनीक-आधारित उद्यमों, ग्रामीण नवाचारों, सतत विनिर्माण तथा उद्यमिता विकास को प्रोत्साहित कर स्टार्टअप एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना है। मैसर्स ससपैक टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड को सीयूपीआरडीएफ की इग्निशन ग्रांट योजना के अंतर्गत ₹8.30 लाख की वित्तीय एवं इन्क्यूबेशन सहायता प्रदान की गई है। यह स्टार्टअप धान की पराली को पर्यावरण-अनुकूल डिस्पोजेबल टेबलवेयर में परिवर्तित करने पर कार्य कर रही है, जिससे पारंपरिक उत्पादों के टिकाऊ विकल्प उपलब्ध कराने के साथ-साथ कृषि अपशिष्ट प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा।

उद्घाटन के उपरांत अतिथियों ने डीएसटी एवं विश्वविद्यालय के सहयोग से विकसित विभिन्न इन्क्यूबेशन एवं नवाचार सुविधाओं का अवलोकन किया। इनमें पायलट स्तर की फूड प्रोसेसिंग सुविधा, डिजाइन एंड डेवलपमेंट (डी एंड डी) लैब, फैब्रिकेशन एवं मैकेनिकल वर्कशॉप से युक्त फैब लैब, अत्याधुनिक थ्री-डी प्रिंटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, कॉन्फ्रेंस हॉल, कैफेटेरिया तथा साझा स्टार्टअप कार्यालय शामिल रहे। गणमान्य अतिथियों ने कृषि अपशिष्ट के उपयोग, पर्यावरणीय स्थिरता तथा सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में स्टार्टअप के नवाचारपूर्ण प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसी तकनीकों में पराली जलाने की समस्या के समाधान के साथ-साथ रोजगार सृजन एवं टिकाऊ व्यवसायिक अवसर विकसित करने की व्यापक संभावनाएँ हैं।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित इंटरैक्टिव सत्र में इन्क्यूबेटेड स्टार्टअप्स ने अपने नवाचारपूर्ण उत्पादों एवं तकनीकों का प्रदर्शन भी किया। आयुकेयर हेल्थकेयर एंड डायग्नोस्टिक्स के डॉ. सुनील सिंह एवं डॉ. रविंद्रेश छाबड़ा ने सर्वाइकल कैंसर की प्रारंभिक जांच हेतु तैयार-प्रयोग एचपीवी डिटेक्शन स्ट्रिप प्रस्तुत की। वहीं उच्चार इनोवेशंस एलएलपी की डॉ. मीनू अरोड़ा एवं डॉ. अर्चना रानी ने कृषि उपयोगों के लिए धान की पराली से बायोचार बनाने संबंधी तकनीक प्रदर्शित की। इसके अतिरिक्त हरिनारायण रिसाइक्लर्स प्राइवेट लिमिटेड के डॉ. विवेक शर्मा ने पीईटी अपशिष्ट पुनर्चक्रण एवं सर्कुलर इकोनॉमी समाधान संबंधी पहल प्रस्तुत की।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. राजीव आहूजा ने सीयूपीआरडीएफ द्वारा विकसित किए जा रहे सशक्त नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह इन्क्यूबेटर क्षेत्र में उद्यमिता एवं प्रौद्योगिकी विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। उन्होंने कुलपति प्रो. राघवेंद्र पी. तिवारी के नेतृत्व की भी प्रशंसा की, जिसके माध्यम से विश्वविद्यालय में नवाचार, उद्यमिता, सतत विनिर्माण एवं स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहन मिल रहा है।

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