सीएसजेएमयू में कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने किया 'गौरव गाथा' स्मारिका का विमोचन
कानपुर । हिंदी पत्रकारिता के 200 साल के गौरवशाली सफर, उसके सामाजिक योगदान और आने वाली चुनौतियों को नमन करते हुए, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय...

कानपुर । हिंदी पत्रकारिता के 200 साल के गौरवशाली सफर, उसके सामाजिक योगदान और आने वाली चुनौतियों को नमन करते हुए, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय...
कानपुर । हिंदी पत्रकारिता के 200 साल के गौरवशाली सफर, उसके सामाजिक योगदान और आने वाली चुनौतियों को नमन करते हुए, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा एक विशिष्ट स्मारिका (मैगज़ीन) प्रथम भाग का निर्माण किया गया है। जिसका शीर्षक "हिंदी पत्रकारिता के गौरवमयी 200 साल की गौरव गाथा (1826-2026)" रखा गया है। इस भव्य, विश्लेषणात्मक और संग्रहणीय पत्रिका का विमोचन सीएसजेएमयू के कुलपति, प्रो. विनय कुमार पाठक ने शनिवार को कैंपस के सेंटर फॉर अकादमिक में किया । यह आयोजन महज एक किताब या पत्रिका का विमोचन नहीं था, बल्कि भारत के उस समृद्ध पत्रकारिता इतिहास का उत्सव था जिसने गुलामी की ज़ंजीरों को तोड़ने से लेकर आज के आधुनिक 'डिजिटल इंडिया' तक की मज़बूत नीव रखी है।
मैगज़ीन का विमोचन करते हुए कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने हिंदी पत्रकारिता के उन तमाम महानायकों, संस्थाओं और गुमनाम क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने अपनी कलम को हथियार बनाकर देश और समाज की सेवा की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज से ठीक दो सदी पहले, 30 मई 1826 को जब पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने कलकत्ता की धरती से 'उदंत मार्तंड' का पहला अंक निकाला था, तब उन्होंने शायद ही यह कल्पना की होगी कि यह छोटा सा पौधा एक दिन 200 सालों के बाद इतना विशाल वट-वृक्ष बन जाएगा। हिंदी पत्रकार ने अपने लंबे सफर में कभी भी अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया। इसने हमेशा शोषित और वंचित वर्ग की आवाज़ बनने और सत्ता से सीधे सवाल करने का साहस दिखाया है।
प्रो. पाठक ने जोर दिया कि आज के दौर में, जब पूरी दुनिया एक नए आत्मनिर्भर भारत की तरफ देख रही है, तब पत्रकारिता की भूमिका और भी ज़िम्मेदारी भरी हो जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज की पत्रकारिता को 'विकसित भारत @ 2047' के राष्ट्रीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर काम करना चाहिए। कुलपति ने पत्रकारिता विभाग की इस महान शोध-परक पहल की प्रशंसा की। उन्होंने विश्वास जताया कि यह स्मारिका आने वाली पीढ़ियों और पत्रकारिता के छात्रों के लिए एक 'रेफरेंस बुक' (संदर्भ ग्रंथ) के रूप में मील का पत्थर साबित होगी। इस बेहतरीन मैगज़ीन को प्रदेश की राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने शुभकामनाएं प्रेषित की । इसके साथ ही देश के शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान,रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ,विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सीएसजेएमयू के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग को शुभकामना संदेश भेजा है ।
स्मारिका का संपादन विभागाध्यक्ष डॉ.दिवाकर अवस्थी ने किया है।संपादक मंडल में डॉ. ओम शंकर गुप्ता, डॉ. योगेंद्र पांडे, डॉ. जितेंद्र डबराल, डॉ. रश्मि गौतम, डॉ. हरिओम कुमार जैसे अनुभवी शिक्षकों ने इसके कंटेंट को निखारने, भाषा को शुद्ध करने और तरीकों की जांच करने में अपनी अहम भूमिका निभाई। वही पेज लेआउट, ग्राफ़िक डिज़ाइनिंग और प्रूफ़रीडिंग और तकनीकी काम में विभाग के शिक्षक सागर कनौजिया व छात्र हिमांशु मौर्य, प्रांजल सचान ने अहम भूमिका निभाई ।





