ज्ञान, संस्कार और नवाचार से विकसित भारत का सपना साकार करेंगे युवा : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

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ज्ञान, संस्कार और नवाचार से विकसित भारत का सपना साकार करेंगे युवा : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
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उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे उत्तरदायी, संवेदनशील और संस्कारित नागरिक तैयार करना है जो समाज, राष्ट्र और मानवता के कल्याण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है और इसके लिए ज्ञान, नवाचार, नैतिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति तथा सामाजिक उत्तरदायित्व का समन्वय आवश्यक है। कुलाधिपति माननीय राज्यपाल विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं। समारोह में राज्यसभा सांसद एवं प्रख्यात चिंतक डॉ. सुधांशु त्रिवेदी मुख्य अतिथि तथा उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेन्द्र उपाध्याय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध, नवाचार एवं अधोसंरचनात्मक उपलब्धियों का विस्तृत विवरण रखा।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, भारतीय एवं विदेशी भाषाओं के अध्ययन-अध्यापन, कौशल विकास, स्टार्टअप, नवाचार, शोध, महिला सशक्तीकरण, स्वास्थ्य जागरूकता तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान की वाहक है। विश्वविद्यालय द्वारा संस्कृत, पाली, हिन्दी, उर्दू, फ़ारसी, अंग्रेज़ी के साथ-साथ जर्मन, जापानी, चीनी, फ्रेंच तथा अवधी भाषा के अध्ययन की दिशा में किए जा रहे प्रयास इसकी विशिष्ट पहचान हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का माध्यम बनें तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें।

आनंदीबेन ने कहा कि मुझे विशेष संतोष है कि विगत एक वर्ष में विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न संस्थानों के साथ 71 समझौता-ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की वैश्विक स्वीकार्यता, शैक्षिक उत्कृष्टता और अनुसंधान के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का परिचायक है। ऐसे सहयोग ज्ञान के आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान, संयुक्त प्रकाशन और विद्यार्थियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलते हैं।

कुलाधिपति ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा सभी से तीन संकल्प लेने का आग्रह करुँगी:-

पहला, अपनी भाषा और भारतीय भाषाओं के सम्मान एवं संवर्धन का।

दूसरा, ज्ञान का उपयोग केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए करने का।

तीसरा, जीवन में सत्य, संवेदना, करुणा और नैतिकता को सर्वोच्च स्थान देने का।

मुख्य अतिथि डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार अर्जित करना नहीं, बल्कि ज्ञान, इच्छा और कर्म का समन्वय स्थापित कर एक श्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा राष्ट्र है और यही युवा शक्ति विकसित भारत की सबसे बड़ी आधारशिला है। भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत तथा आधुनिक विज्ञान के समन्वय से भारत विश्व का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है। उन्होंने विद्यार्थियों से नवाचार, उद्यमिता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व को अपने जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया। यह भी एक संयोग है कि भाषा विश्वविद्यालय उस नगर में स्थित है, जहाँ भाषा, तहज़ीब और अदब की परंपरा सबसे अधिक समृद्ध रही है। लखनऊ वह शहर है, जहाँ की रवायतें और नज़ाकतें केवल जीवनशैली नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक विरासत हैं। यहाँ अदब है, तहज़ीब है, और संवाद की एक विशिष्ट मर्यादा है। प्रो त्रिवेदी ने कहा कि जब हम लखनऊ में भाषा विश्वविद्यालय की बात करते हैं, तो यह केवल एक शैक्षणिक संस्थान की बात नहीं रह जाती, बल्कि एक ऐसी सांस्कृतिक जिम्मेदारी की बात बन जाती है, जिसमें भाषा, साहित्य और संस्कार तीनों का संगम दिखाई देता

कुलाधिपति आनंदीबेन ने कहा कि आज के बदलते सामाजिक परिवेश में माँ-बेटी के बीच खुला संवाद अत्यंत आवश्यक है। यह सम्मेलन इसी संवाद को प्रोत्साहित करता है, जिससे परिवार में विश्वास और अपनापन बढ़ता है तथा बेटियाँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होती हैं।

विशिष्ट अतिथि एवं प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप मूल्यपरक, रोजगारोन्मुखी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही विकसित भारत की आधारशिला है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा भाषा शिक्षा, शोध, नवाचार, कौशल विकास, सामाजिक दायित्व तथा वैश्विक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर नई पहचान स्थापित कर रहा है।

कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि सत्र 2025-26 में आयोजित परीक्षाओं में 1270 विद्यार्थियों में से 1236 विद्यार्थी सफल हुए तथा 11वें दीक्षांत समारोह में कुल 125 मेधा पदक प्रदान किए गए, जिनमें 54 स्वर्ण पदक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में विश्वविद्यालय 98 शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित कर रहा है तथा विदेशी विद्यार्थियों को आकर्षित करने के लिए ‘स्टडी इन इंडिया’ पोर्टल पर पंजीकरण किया गया है। नए व्यावसायिक एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ बी.टेक., एम.टेक., एम.एससी. तथा अन्य आधुनिक पाठ्यक्रम प्रारम्भ किए गए हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने अब तक 71 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से जर्मन, फ्रेंच, जापानी, अंग्रेज़ी एवं अरबी भाषाओं के प्रशिक्षण की विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे युवाओं के लिए वैश्विक रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। विश्वविद्यालय में साइबर सिक्योरिटी लैब, आधुनिक रसायन प्रयोगशालाएँ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वैल्यू एडेड कोर्स, स्टार्टअप एवं इन्क्यूबेशन सेंटर तथा अत्याधुनिक शोध सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। कुलपति तनेजा ने बताया कि विश्वविद्यालय में आयोजित वृहद रोजगार मेले के माध्यम से 461 विद्यार्थियों का चयन गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, टाटा मोटर्स, वॉलमार्ट, हिताची सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों में हुआ। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल, एनसीसी, शोध, नवाचार तथा सांस्कृतिक गतिविधियों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है।

सामाजिक उत्तरदायित्व के अंतर्गत विश्वविद्यालय द्वारा रक्तदान, मतदाता जागरूकता, महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण संरक्षण, डिजिटल साक्षरता, स्वास्थ्य जागरूकता एवं ग्रामीण विकास से जुड़े 245 से अधिक सामाजिक सेवा अभियान संचालित किए गए। इस अवसर पर कुलपति ने विश्वविद्यालय की भावी योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भविष्य में नई भाषा प्रयोगशालाओं की स्थापना, अधोसंरचना विस्तार, खेल सुविधाओं का विकास, अनुसंधान एवं पेटेंट को प्रोत्साहन, आधुनिक प्रयोगशालाओं का उन्नयन, सतत ऊर्जा, उद्योग-अकादमिक सहयोग तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।

कार्यक्रम का संचालन डॉ नीरज शुक्ल ने किया जबकि इस दौरान कुलसचिव विकास, डीन अकादमिक प्रो सौबान सईद, प्रो मसूद आलम, प्रो हैदर अली, डॉ पूनम चौधरी और डॉ ममता शुक्ला सहित विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, एनसीसी कैडेट सहित विद्यार्थी भारी संख्या में उपस्थित रहे.

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