मियावाकी पद्धति से विकसित होगा ‘तमसा वन’, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एमएसडीयू की अभिनव पहल
आजमगढ़, 30 जुलाई। महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय (एमएसडीयू), आजमगढ़ में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन एवं हरित परिसर के निर्माण के उद्देश्य...

आजमगढ़, 30 जुलाई। महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय (एमएसडीयू), आजमगढ़ में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन एवं हरित परिसर के निर्माण के उद्देश्य...
आजमगढ़, 30 जुलाई। महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय (एमएसडीयू), आजमगढ़ में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन एवं हरित परिसर के निर्माण के उद्देश्य से "तमसा वन (मियावाकी पद्धति)" के अंतर्गत वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अभियान के माध्यम से कम क्षेत्रफल में अधिक घनत्व के साथ देशी प्रजातियों के पौधों का रोपण कर प्राकृतिक वन विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि मियावाकी पद्धति कम समय में घने एवं जैव विविधता से समृद्ध वन विकसित करने की वैज्ञानिक तकनीक है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए पौधारोपण के साथ-साथ पौधों का संरक्षण भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों से इस अभियान को जनभागीदारी का स्वरूप देने का आह्वान किया।
कुलसचिव श्री अमृतलाल ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक एवं पर्यावरणीय दायित्वों के निर्वहन के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि "तमसा वन" विश्वविद्यालय परिसर की हरित पहचान बनेगा और भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करेगा।
चरक वानस्पतिक उद्यान की संयोजिका डॉ. प्रियंका सिंह ने बताया कि मियावाकी पद्धति में स्थानीय प्रजातियों के पौधों का सघन रोपण किया जाता है, जिससे कम समय में प्राकृतिक वन का विकास संभव होता है। उन्होंने कहा कि यह पहल जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए पर्यावरणीय अध्ययन एवं शोध का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनेगी।
कार्यक्रम का संयोजन प्रो.शैलेन्द्र विक्रम सिंह ने किया। इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक आनन्द कुमार मौर्य, सहायक कुलसचिव डॉ. महेश श्रीवास्तव, श्री नित्यानंद सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक पौधारोपण किया। वृक्षारोपण समिति के सदस्य डॉ.शफी उज्जमा , डॉ. रमेश कुमार, डॉ. विपिन मौर्य, डॉ. अमित गुप्ता एवं डॉ. पल्लवी सिंह भी उपस्थित रहे। अंत में सभी ने पौधों के संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संकल्प लिया।





