महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ का तृतीय दीक्षांत समारोह भव्यता के साथ सम्पन्न

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महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ का तृतीय दीक्षांत समारोह भव्यता के साथ सम्पन्न
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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 74 मेधावियों को दिए 88 पदक, ज्ञान को रोजगार और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर जोर

आजमगढ़, 11 अगस्त।महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ का तृतीय दीक्षांत समारोह-2026 मंगलवार को विश्वविद्यालय परिसर में गरिमापूर्ण एवं भव्य वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह में शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकार, स्वास्थ्य जागरूकता, ग्रामीण विकास और सांस्कृतिक चेतना को भी प्रमुख मंच मिला।समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने की। पद्मविभूषण पं. हरि प्रसाद चौरसिया मुख्य अतिथि, उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेन्द्र उपाध्याय अतिविशिष्ट अतिथि रहे |समारोह में मानद उपाधि से सम्मानित पटोला शिल्पकार पंकजभाई डूंगरभाई मकवाना भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।74 मेधावियों को 88 पदक, छात्राओं ने मारी बाजीदीक्षांत समारोह में शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए कुल 74 मेधावी छात्र-छात्राओं को 88 पदक प्रदान किए गए। इनमें 20 कुलाधिपति पदक और 68 कुलपति पदक शामिल हैं। पदक प्राप्तकर्ताओं में 26 छात्र और 48 छात्राएं रहीं। इसके अतिरिक्त 11 स्नातक और 63 परास्नातक छात्र-छात्राओं को उपाधियां वितरित की गईं।पदक वितरण के साथ विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों के अंकपत्र एवं उपाधि को डिजीलॉकर में भी समावेशित किया, जिसे डिजिटल सुविधा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।

राज्यपाल का संदेश: शिक्षा से राष्ट्र निर्माण

राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने मेधावियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षा को केवल व्यक्तिगत सफलता का माध्यम न बनाकर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देना चाहिए। उन्होंने छात्राओं की उपलब्धियों की विशेष सराहना करते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी डिग्री देना ही नहीं, बल्कि ऐसे युवा तैयार करना है जो ज्ञान, संस्कार और प्रतिभा से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएं। विद्यार्थियों को परिवार, समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भी संदेश दिया।

कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने स्वागत उद्बोधन एवं विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि एमएसडीयू नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य विद्यार्थियों को केवल रोजगार योग्य बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है।मुख्य अतिथि पद्मविभूषण पं. हरि प्रसाद चौरसिया ने अपने संबोधन में शिक्षा, साधना, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रतिभा को सफलता में बदलने के लिए धैर्य और समर्पण आवश्यक है। बांसुरी वादन की अपनी जीवन यात्रा का उदाहरण देते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति निरंतरता बनाए रखने की प्रेरणा दी।

अतिविशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि ज्ञान को रोजगार, स्वरोजगार और राष्ट्र निर्माण से जोड़ना है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से अपेक्षा की कि वे NEP-2020 के अनुरूप कौशल आधारित शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दें, ताकि युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी पहचान बना सकें।

मानद उपाधि प्राप्तकर्ता पंकजभाई डूंगरभाई मकवाना ने अपने संबोधन में गुजरात की प्राचीन डबल इकट पटोला बुनाई परंपरा को संरक्षित करने के अपने संघर्ष को साझा किया। उन्होंने कहा कि परंपरा और आधुनिकता के समन्वय से ही हस्तशिल्प को वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वरोजगार और कौशल आधारित उद्योगों को अपनाकर आत्मनिर्भर बनें और भारत की सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखें।सामाजिक सरोकारों को मिला विशेष स्थानदीक्षांत को केवल उपाधि वितरण तक सीमित न रखते हुए विश्वविद्यालय ने इसे

सामाजिक मंच बनाया:

गोद लिए गए 5 गांवों - सोनापुर, महरूपुर, धरवारा, सीही और समेंदा के 24 छात्र-छात्राओं को राज्यपाल ने प्रशस्ति पत्र एवं शैक्षिक किट देकर सम्मानित किया। इन गांवों के शिक्षकों यशवंत सिंह, राजेंद्र प्रसाद, प्रतिमा मिश्रा, राजेश कुमार मिश्रा और चंद्रकला पांडेय को भी सम्मानित किया गया।प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को पुस्तकें, प्रेरक कहानियां, कलर-बुक्स, स्कूल बैग और रंग सामग्री वितरित की गई। बच्चों ने देशभक्ति, लोकगीत और पर्यावरण संरक्षण पर प्रस्तुतियां देकर अतिथियों का ध्यान आकर्षित किया।एचपीवी टीकाकरण का अवलोकन किया गया और आजमगढ़-मऊ की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को किट एवं प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।

नौ निर्माण कार्यों का उद्घाटन और NEP-2020 पर पहल

समारोह के अवसर पर विश्वविद्यालय के नौ निर्माण कार्यों का उद्घाटन हुआ। इनमें महिला-पुरुष छात्रावासों की चहारदीवारी, कुलपति एवं अधिकारी आवास, वाहन पार्किंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष, दत्तात्रेय सरोवर, चरक वानस्पतिक उद्यान एवं तमसा वन, अकादमिक भवनों के बीच कवर्ड पाथवे तथा इंडियन बैंक की शाखा शामिल हैं।कुलाधिपति ने NEP-2020 के क्रियान्वयन की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा को लचीला, बहुविषयक, कौशल आधारित और रोजगारपरक बना रहा है। डिजिटल सुविधाओं, नए पाठ्यक्रमों और उद्योगों के साथ एमओयू के माध्यम से विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा रहा है।कुलाधिपति महोदया नें विश्वविद्यालय के केन्द्रीय पुस्तकालय की सराहना भी की|

पुस्तक विमोचन और सम्मान समारोह में विश्वविद्यालय की अर्धवार्षिक पत्रिका का विमोचन हुआ। साथ ही विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों के प्राध्यापकों की 6 पुस्तकों का लोकार्पण जिसमें डॉ.देवेन्द्र कुमार पाण्डेय,सूर्य प्रकाश अग्रहरी आदि और 4 शिक्षकों को बेस्ट टीचर अवार्ड से सम्मानित किया ,जिसमे विश्वविद्यालय की डॉ. प्रियंका सिंह सहित प्रो.गीता सिंह ,प्रो.अरुण कुमार सिंहऔर प्रो. मो.तारिक मुख्य रहे |

अंत में कुलपति ने समारोह की सफलता के लिए शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, आयोजन समितियों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समारोह की सफलता सामूहिक समन्वय और अनुशासन का परिणाम है।कार्यक्रम का सञ्चालन वैशाली सिंह ने किया | वित्त अधिकारी शैलेश गिरी सहित कार्य परिषद एवं विद्या परिषद के सदस्यों ने आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई।समारोह के अंतिम चरण में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ।यह समारोह केवल मेधावियों के सम्मान का अवसर नहीं रहा, बल्कि इसने शिक्षा, समाज, स्वास्थ्य, पर्यावरण, कौशल और राष्ट्रनिर्माण को एक साथ जोड़कर विश्वविद्यालय की बढ़ती साख और संस्थागत विकास का संदेश दिया।

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