राज्यपाल ने कहा-संस्कारयुक्त शिक्षा से ही विकसित भारत का निर्माण, युवाओं को नशे से दूर रहने का किया आह्वान

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राज्यपाल ने कहा-संस्कारयुक्त शिक्षा से ही विकसित भारत का निर्माण, युवाओं को नशे से दूर रहने का किया आह्वान
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दीक्षांत समारोह में 104 मेधावी विद्यार्थियों को 120 स्वर्ण पदक, 1.66 लाख उपाधियां डिजिलॉकर में समावेशित

अयोध्या। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में बुधवार को डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या का 31वां दीक्षांत समारोह भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति ने 104 मेधावी छात्र-छात्राओं को 120 स्वर्ण पदक प्रदान किए। इसके साथ ही उन्होंने स्नातक एवं परास्नातक की 1,66,055 उपाधियों एवं अंकपत्रों को डिजिलॉकर में समावेशित किया। इस अवसर पर कुलाधिपति ने विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ संस्कार, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने का केंद्र नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, विचारों के परिष्कार और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र है।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कुलाधिपति ने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार, स्वाभिमान और सामाजिक जिम्मेदारी का संकल्प लेने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश गंगा, यमुना और सरस्वती की पावन भूमि है। यह भगवान श्रीराम, शिव और श्रीकृष्ण की आराधना एवं आध्यात्मिक चेतना की भूमि है। अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की नगरी है और यहां से शिक्षा प्राप्त कर निकलने वाले विद्यार्थियों का दायित्व है कि वे अपने गौरवशाली अतीत को स्मरण करते हुए उज्ज्वल भविष्य के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ें। राज्यपाल ने कहा कि डॉ. राममनोहर लोहिया ने आध्यात्मिक एवं धार्मिक चेतना के साथ स्वाभिमान और भारतीय अस्मिता को महत्व दिया। उन्होंने धर्म को धर्मांतरण से अलग बताते हुए भारतीय संस्कृति और परंपरा के मूल तत्वों को समझने की आवश्यकता पर बल दिया। कुलाधिपति ने कहा कि व्यक्ति ईश्वर को माने अथवा न माने, लेकिन भारतीय समाज की एकता और अखंडता के महत्व से इनकार नहीं कर सकता। विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने के बाद यह विचार करना चाहिए कि वे कौन-से संस्कार लेकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान देंगे। उन्होंने दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी सफलता में शिक्षकों और अभिभावकों का महत्वपूर्ण योगदान है। माता-पिता और गुरुजनों के विश्वास एवं सतत प्रयासों ने विद्यार्थियों को इस मुकाम तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का अवसर भी है।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय द्वारा 1,66,055 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें लगभग 60 प्रतिशत छात्र और 40 प्रतिशत छात्राएं हैं। समारोह में 120 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें 86 पदक छात्राओं ने अर्जित किए, जो कुल पदकों का लगभग 72 प्रतिशत है। उन्होंने इसे बदलते भारत की तस्वीर बताते हुए कहा कि बेटियां शिक्षा को अधिक अनुशासित और गंभीरता से ग्रहण कर रही हैं। उन्होंने महिला शिक्षा और सशक्तिकरण को देश की प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बताया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री संजय श्रीनेत के अनुभव का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि पारदर्शी और निष्पक्ष कार्यप्रणाली युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देशों में अग्रणी है और युवा शक्ति विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी आधारशिला है।

विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। विश्वविद्यालय ने एनआईआरएफ इंजीनियरिंग श्रेणी में देश में 138वां और उत्तर प्रदेश में 18वां स्थान प्राप्त किया है। विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों ने विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 304 पदक अर्जित किए हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसे अभियानों का उद्देश्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाना है। राज्यपाल ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 तक भारत की 615 पुरातन वस्तुएं विदेशों से वापस लाई जा चुकी हैं। प्रत्येक प्रतिमा और पुरातन वस्तु केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि देश की विरासत और पहचान का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी संस्कृति और विरासत को समझने तथा उसे आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि नशा व्यक्ति से उसका भविष्य छीन लेता है। प्रधानमंत्री के नशामुक्ति अभियान का उद्देश्य युवा शक्ति को नशे से दूर रखना है। उन्होंने कहा कि यदि कोई एक युवा भी नशे की गिरफ्त में जाने से बचता है तो यह समाज के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने युवाओं से अपने आसपास के लोगों को भी नशे से बचाने के लिए जागरूक करने का आह्वान किया। राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधन हमें विरासत में नहीं मिले हैं कि हम उन्हें मनमाने ढंग से नष्ट करें। प्लास्टिक पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती है, इसलिए इसके विरुद्ध व्यापक जनभागीदारी आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए राज्यपाल ने कहा कि सशक्त नारी ही सशक्त भविष्य का निर्माण कर सकती है। उन्होंने बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने छात्राओं के स्वास्थ्य परीक्षण और पोषण संबंधी जागरूकता की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने अपने सामाजिक अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि भूकंप के बाद उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों के गांवों का दौरा किया और महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से संस्था के माध्यम से कार्य शुरू किया। इस प्रयास से लगभग 80 हजार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिली और संस्था के माध्यम से करोड़ों रुपये का कारोबार संभव हुआ। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की कल्पना तभी साकार होगी जब गांवों की महिलाएं और युवा आर्थिक रूप से सशक्त होंगे।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रावासों और विद्यार्थियों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने छात्रावासों में गैस के स्थान पर लकड़ी से भोजन पकाए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर को और अधिक सुंदर, स्वच्छ एवं सुविधायुक्त बनाने तथा निर्माणाधीन नए पुस्तकालय भवन का कार्य गुणवत्तापूर्वक पूरा कराने पर जोर दिया। उन्होंने मेधावी छात्राओं के लिए जिला स्तर पर छात्रावास की व्यवस्था किए जाने की भी बात कही। राज्यपाल ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित संस्थाएं उनके द्वारा बताए गए बिंदुओं पर गंभीरता से कार्य करती हैं तो उन्हें अत्यंत प्रसन्नता होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा, संस्कार, स्वाभिमान, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति और राष्ट्र निर्माण को अपने जीवन का संकल्प बनाने का आह्वान किया।

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