एमएसडीयू में ताइक्वांडो से सशक्त हो रहीं छात्राएं
आजमगढ़, 19 अगस्त। महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ में छात्राओं को आत्मरक्षा के साथ आत्मविश्वासी, अनुशासित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में शुरू...

आजमगढ़, 19 अगस्त। महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ में छात्राओं को आत्मरक्षा के साथ आत्मविश्वासी, अनुशासित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में शुरू...
आजमगढ़, 19 अगस्त। महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ में छात्राओं को आत्मरक्षा के साथ आत्मविश्वासी, अनुशासित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में शुरू किया गया ताइक्वांडो प्रशिक्षण कार्यक्रम उत्साह के साथ आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय की इस पहल से छात्राओं में न केवल आत्मरक्षा की तकनीक सीखने की रुचि बढ़ रही है, बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता भी विकसित हो रही है। प्रशिक्षण के लिए अब तक 150 छात्राओं ने पंजीकरण कराया है।
कुलपति प्रो. संजीव कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को विषम परिस्थितियों में स्वयं की सुरक्षा करने के लिए सक्षम बनाना है। कुलपति ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा के साथ जीवनोपयोगी कौशल, आत्मविश्वास और अनुशासन का विकास भी आवश्यक है। ताइक्वांडो प्रशिक्षण छात्राओं को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
कार्यक्रम के प्रथम प्रशिक्षण सत्र में 19 अगस्त को आयोजित दूसरे प्रशिक्षण सत्र में 32 छात्राओं ने हिस्सा लिया। लगभग डेढ़ घंटे चले प्रशिक्षण सत्र में छात्राओं को सबसे पहले वार्मअप और स्ट्रेचिंग का अभ्यास कराया गया। इसके बाद शरीर को मजबूत, लचीला और चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए विभिन्न शारीरिक व्यायामों का प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस के पीटीआई एवं प्रशिक्षक सुनील कुमार शिंदे ने छात्राओं को आत्मरक्षा के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आत्मरक्षा का प्रशिक्षण केवल किसी हमले से बचने की तकनीक सीखना नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से व्यक्ति में सजगता, साहस, आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। उन्होंने छात्राओं को किसी भी विषम परिस्थिति में घबराने के बजाय संयम और आत्मविश्वास के साथ उसका सामना करने के लिए प्रेरित किया।
व्यावहारिक प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को शरीर में लचीलापन बढ़ाने वाले अभ्यास, संतुलन बनाने की तकनीक, बचाव के तरीके, बुनियादी प्रहार तथा उछलने संबंधी अभ्यास कराए गए। प्रशिक्षक ने प्रत्येक तकनीक को पहले समझाया और फिर छात्राओं से उसका अभ्यास कराया। छात्राओं ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ प्रशिक्षण में भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं में विशेष उत्साह देखने को मिला और उन्होंने बार-बार अभ्यास कर तकनीकों को बेहतर ढंग से सीखने का प्रयास किया।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार प्रशिक्षण के लिए पंजीकृत सभी छात्राओं को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक छात्राएं आत्मरक्षा की बुनियादी तकनीकों में दक्ष हो सकें। प्रशिक्षण सत्र प्रत्येक मंगलवार और बुधवार को दोपहर दो बजे आयोजित किए जा रहे हैँ!
एमएसडीयू परिसर में चल रहे इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से छात्राओं के बीच सकारात्मक माहौल बना है। प्रशिक्षण में बढ़ती भागीदारी यह संकेत दे रही है कि छात्राएं आत्मरक्षा को अपने व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही हैं। विश्वविद्यालय की यह पहल ‘डर नहीं, आत्मविश्वास’ की भावना को मजबूत करते हुए छात्राओं को सशक्त, सजग और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।





