मियावाकी पद्धति से कम जगह में विकसित होगा घना जंगल
मऊ, 19 अगस्त। पर्यावरण संरक्षण और जल संचयन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डीसीएसके पीजी कॉलेज, मऊ एवं विश्व गर्भा एनजीओ के संयुक्त तत्वावधान में ग्राम...
मऊ, 19 अगस्त। पर्यावरण संरक्षण और जल संचयन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डीसीएसके पीजी कॉलेज, मऊ एवं विश्व गर्भा एनजीओ के संयुक्त तत्वावधान में ग्राम...
मऊ, 19 अगस्त। पर्यावरण संरक्षण और जल संचयन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डीसीएसके पीजी कॉलेज, मऊ एवं विश्व गर्भा एनजीओ के संयुक्त तत्वावधान में ग्राम कहींनौर में मियावाकी पद्धति से वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम माननीय कुलपति प्रो. संजीव कुमार के मार्गदर्शन एवं प्राचार्य प्रो. शर्वेश पाण्डेय के संरक्षण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. प्रशांत पाण्डेय ने की।
कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने हाल में ही विश्वविद्यालय परिसर में पर्यावरण संरक्षण हेतु पौधे लगवाये और उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे ‘एक छात्र, एक वृक्ष’ के संकल्प को जनअभियान बनाएं। उन्होंने कहा कि छोटे क्षेत्र में अधिक देशी पौधों का रोपण कर मियावाकी पद्धति के माध्यम से हरित क्षेत्र को तेजी से विकसित किया जा सकता है।
प्राचार्य प्रो. शर्वेश पाण्डेय ने कहा कि विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वृक्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक विरासत हैं। प्रत्येक विद्यार्थी को पौधरोपण के साथ उसकी नियमित देखभाल की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।
पर्यावरण भूगोल के प्रवक्ता डॉ. घनश्याम दुबे ने मियावाकी तकनीक की जानकारी देते हुए बताया कि जापानी वनस्पति वैज्ञानिक प्रो. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित इस पद्धति में कम स्थान में देशी प्रजातियों के अधिक पौधे लगाकर घना वन विकसित किया जाता है।
एनजीओ के कोऑर्डिनेटर सागर सिंह ने जल संरक्षण मॉडल के माध्यम से वर्षाजल संचयन की प्रक्रिया समझाई। अंकित सिंह ने ‘रमैया’ कहानी के माध्यम से विद्यार्थियों को पौधरोपण के लिए प्रेरित किया। छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. घनश्याम दुबे ने किया। सचिव श्री शशि सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम की जानकारी विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने दी।





