उभरती तकनीकों और बदलते रोजगार के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार करें शिक्षक : प्रो. मुकेश पाण्डेय
*झांसी।** शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित उभरती हुई आधुनिक तकनीकों का सकारात्मक, सर्वोत्तम और आवश्यकता के अनुरूप उपयोग करना चाहिए। वर्तमान समय...

*झांसी।** शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित उभरती हुई आधुनिक तकनीकों का सकारात्मक, सर्वोत्तम और आवश्यकता के अनुरूप उपयोग करना चाहिए। वर्तमान समय...
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झांसी।** शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित उभरती हुई आधुनिक तकनीकों का सकारात्मक, सर्वोत्तम और आवश्यकता के अनुरूप उपयोग करना चाहिए। वर्तमान समय में रोजगार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे में शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे स्वयं नई तकनीकों से परिचित रहें और विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाएं।
यह विचार बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने विश्वविद्यालय के कॉन्फ्रेंस कमेटी हॉल में रोटरी क्लब ऑफ झांसी एलीट द्वारा आयोजित ‘शिक्षक रत्न सम्मान समारोह’ में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षकों को शिक्षा, शोध, विद्यार्थी विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए शिक्षक रत्न सम्मान प्रदान किया गया।
कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने शिक्षकों के समक्ष वर्तमान और भविष्य की तीन प्रमुख चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहली चुनौती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य उन्नत तकनीकों को सीखने तथा उनका शिक्षण में सकारात्मक उपयोग करने की है। शिक्षक तकनीक से दूरी बनाकर नहीं रह सकते। उन्हें बदलती परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को निरंतर अद्यतन करना होगा।
उन्होंने दूसरी चुनौती कौशल विकास और रोजगार की बदलती प्रकृति को बताया। कुलपति ने कहा कि आज रोजगार का स्वरूप पहले जैसा नहीं रहा। नौकरियों की प्रकृति प्रतिदिन बदल रही है और नई योग्यताओं तथा कौशलों की आवश्यकता सामने आ रही है। इसलिए शिक्षकों को विद्यार्थियों में केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल, समस्या समाधान की क्षमता, नवाचार और बदलती कार्य-संस्कृति के अनुरूप स्वयं को ढालने की योग्यता भी विकसित करनी होगी।
तीसरी चुनौती का उल्लेख करते हुए उन्होंने ह्यूमनॉइड रोबोट और मानव के समान कार्य करने वाली मशीनों के बढ़ते उपयोग की चर्चा की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शिक्षकों और विद्यार्थियों को ऐसी तकनीकों के प्रभाव को समझना होगा। शिक्षा का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को तैयार करना होना चाहिए, जो तकनीकी बदलावों से भयभीत होने के स्थान पर उनका विवेकपूर्ण उपयोग कर सकें और प्रत्येक चुनौती का समाधान खोजने में सक्षम बनें। विशेष तौर पर डिजिटल एडिक्शन को डिजिटल डीटॉक्स में बदलना सबसे बड़ी चुनौती है।
अपने उद्बोधन के प्रारंभ में कुलपति ने शिक्षक दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन तथा उनके विद्यार्थियों के साथ हुए उस प्रसिद्ध संवाद का उल्लेख किया, जिसमें डॉ. राधाकृष्णन ने अपने जन्मदिन को व्यक्तिगत रूप से मनाने के बजाय शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा व्यक्त की थी।
उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का भी स्मरण किया। कुलपति ने कहा कि डॉ. कलाम अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रहने के बावजूद स्वयं को सबसे अधिक एक शिक्षक के रूप में याद किया जाना चाहते थे। यह भावना शिक्षण के महत्व और शिक्षक की सामाजिक प्रतिष्ठा को प्रदर्शित करती है।
कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने कहा कि शिक्षक का कार्य कक्षा में पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है। शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करता है और उन्हें जीवन की चुनौतियों से संघर्ष करने की शक्ति प्रदान करता है। वर्तमान और भविष्य में ऐसे विद्यार्थियों को तैयार करना होगा, जो ज्ञान, कौशल, मानवीय संवेदनाओं और तकनीकी दक्षता के साथ समाज तथा राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकें।
अपने संबोधन के अंतिम भाग में कुलपति ने रोटरी क्लब ऑफ झांसी एलीट और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के संयुक्त प्रयासों की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि दोनों संस्थाएं उन्नत भारत अभियान, महिला सशक्तीकरण, समावेशी शिक्षा तथा सामाजिक और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में मिलकर कार्य कर सकती हैं। रोटरी क्लब और विश्वविद्यालय के समन्वित प्रयास सामाजिक एवं ग्रामीण विकास का एक नया मॉडल प्रस्तुत कर सकते हैं, जिससे समाज के सभी हितधारकों को लाभ मिलेगा। भविष्य में संयुक्त उपक्रमों से दोनों संस्थाओं को आगे बढ़ने और समाज के व्यापक हित में कार्य करने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम के प्रारंभ में रोटरी क्लब ऑफ झांसी एलीट के अध्यक्ष पवित्र हेमंत खन्ना ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने समारोह में उपस्थित शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षक समाज के नैतिक और बौद्धिक निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने शिक्षकों की सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी तथा उनके समर्पण के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने शिक्षक सम्मान कार्यक्रम को रोटरी क्लब ऑफ झांसी एलीट के सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए कहा कि शिक्षकों का सम्मान वास्तव में शिक्षा, समाज और राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है।
रोटरी क्लब ऑफ झांसी एलीट के कोषाध्यक्ष विजयन चौधरी ने रोटरी संस्था के प्रमुख आधारों—लर्न, लीड और सर्विस—की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्था सामुदायिक सेवा, व्यावसायिक विकास और अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप के माध्यम से *‘सर्विस अबव सेल्फ’* अर्थात स्वयं से पहले सेवा के सिद्धांत का पालन करती है।
समारोह में मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय का अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न प्रदान कर विशेष सम्मान किया गया। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार शुक्ल का भी अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम में आईक्यूएसी निदेशक प्रो. सुनील कुमार काबिया, प्रो. पूनम पुरी, प्रो. अर्चना वर्मा, प्रो. मुन्ना तिवारी, प्रो. सौरभ श्रीवास्तव, प्रो. डी.के. भट्ट, प्रो. विनीत कुमार, प्रो. सुनील कुमार प्रजापति, प्रो. काव्या दुबे, डॉ. नूपुर गौतम, डॉ. ऋषि सक्सेना, प्रो. पीयूष भारद्वाज, डॉ. अनुपम व्यास, डॉ. जाकिर अली, डॉ. लवकुश द्विवेदी, डॉ. सुनील कुमार त्रिवेदी, डॉ. इरा तिवारी, डॉ. अचला पाण्डेय, डॉ. ज्योति मिश्रा, डॉ. चेतन आनंद दुबे, डॉ. प्रतिज्ञा पाठक, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. प्रशांत मिश्रा, डॉ. शशि आलोक, डॉ. प्रेम प्रकाश, डॉ. आलोक कुमार माहौर, डॉ. आनंद कुमार पाण्डेय, डॉ. संतोष पाण्डेय, डॉ. नेहा मिश्रा, डॉ. श्वेता पाण्डेय, डॉ. धीरेन्द्र कुमार शर्मा, डॉ. प्रकाश चन्द्र, डॉ. जितेंद्र बबेले, डॉ. प्रतिभा आर्य और डॉ. कौशल त्रिपाठी सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकों को शिक्षक रत्न सम्मान प्रदान किया गया।
समारोह का शुभारंभ विश्वविद्यालय की छात्राओं नैंसी, मांडवी और सिमरन द्वारा प्रस्तुत गणपति वंदना से हुआ। छात्राओं की प्रस्तुति ने समारोह को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।
कार्यक्रम के अंत में सीए निमेष खन्ना ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय, कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार शुक्ल, सम्मानित शिक्षकों, विश्वविद्यालय के आचार्यों और समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने के लिए रजत सूरी, मानसी अग्रवाल, मयंक अग्रवाल, दिवांगना मेहता, जानकी अग्रवाल, अवनीत कौर, पवित्रा हेमंत खन्ना सहित सभी रोटेरियनों को धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम का संचालन जानकी अग्रवाल और अवनीत कौर ने संयुक्त रूप से किया। शिक्षक सम्मान समारोह में अनिल बोहरे, हितिका, हेमंत चंद्र, डॉ. राघवेंद्र दीक्षित और साबिर अली सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अनेक शिक्षक, रोटरी क्लब के सदस्य, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।





