हिमालय केवल पर्वत नहीं, भारत का स्वाभिमान है: प्रो. मुकेश पाण्डेय
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग द्वारा हिमालय दिवस 9 सितम्बर के अवसर पर कुलपति सम्मेलन कक्ष में “Himalayan Ecosystem and...

झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग द्वारा हिमालय दिवस 9 सितम्बर के अवसर पर कुलपति सम्मेलन कक्ष में “Himalayan Ecosystem and...
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग द्वारा हिमालय दिवस 9 सितम्बर के अवसर पर कुलपति सम्मेलन कक्ष में “Himalayan Ecosystem and Biodiversity Conservation” विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन विश्वविद्यालय के प्राणिविज्ञान विभाग द्वारा किया गया। हाइब्रिड मोड में आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने की। मुख्य अतिथि असिस्टेंट कमिश्नर (फूड) पवन कुमार रहे।
मुख्य अतिथि पवन कुमार ने कहा कि जैव विविधता के संरक्षण के लिए प्रकृति के साथ संतुलन बनाना अत्यंत आवश्यक है। हिमालय केवल पर्वतों की श्रृंखला नहीं, बल्कि जल, वन, वन्यजीव, वनस्पतियों और समृद्ध जैव विविधता का विशाल भंडार है। यहां पाए जाने वाले दुर्लभ जीव-जंतु, पक्षी, कीट तथा औषधीय एवं उपयोगी वनस्पतियां पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग में संरक्षण और भावी पीढ़ियों की जरूरतों का ध्यान रखने पर बल दिया।
संगोष्ठी के अध्यक्ष कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने कहा कि भारत के लिए हिमालय केवल पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि देश का स्वाभिमान है। उन्होंने जैव विविधता संरक्षण के लिए वैश्विक ज्ञान को स्थानीय ज्ञान से जोड़ने और उसे व्यवहार में अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी, पुनर्चक्रण योग्य सामग्री का उपयोग, खाद्य बर्बादी रोकना और कचरा प्रबंधन जैसी छोटी पहल भी पर्यावरण में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।
उन्होंने वैश्विक जलवायु अस्थिरता, बादल फटने की घटनाओं और नेपाल में हुई विभीषिका पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रकृति के कुपित होने पर संभलने का अवसर कम मिलता है। भारत सरकार और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रतिबद्ध हैं। वैश्विक तापमान वृद्धि से ग्लेशियरों के पिघलने के खतरे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह “एक्शन एंड एडॉप्शन” का युग है और हमें पर्यावरण हितैषी गतिविधियां अपनानी होंगी। स्वच्छता मिशन और कचरा प्रबंधन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि लोगों की सोच में सकारात्मक बदलाव आया है और अब लोग कूड़ा फेंकने से पहले डस्टबिन खोजते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना तथा इस्कॉन से जुड़े ब्रज जल रंजन के नेतृत्व में सामूहिक “हरे कृष्ण-हरे राम” कीर्तन से हुई।
इंडोनेशिया के पापुआ विश्वविद्यालय से ऑनलाइन जुड़ी मुख्य वक्ता डॉ. वीटा मेयलानी ने जैव विविधता संरक्षण के लिए समग्र प्रयासों की आवश्यकता बताई। उन्होंने स्थानीय समुदायों के ज्ञान और आवश्यकताओं को महत्व देने तथा जल, जंगल और जमीन के संबंध को मानव जीवन से जोड़ते हुए संसाधनों के उपयोग में जलवायु और जैव विविधता का ध्यान रखने पर बल दिया।
विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. आलोक कुमार वर्मा ने हिमालय के वैज्ञानिक महत्व को वहां की समृद्ध वनस्पति और जीव-जंतुओं से जोड़ते हुए जनसहभागिता की आवश्यकता बताई। संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि प्रो. ए.के. श्रीवास्तव रहे। कुलसचिव ज्ञानेन्द्र कुमार ने विद्यार्थियों और शोधार्थियों को हिमालयी पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण संरक्षण पर कार्य करने के लिए प्रेरित किया। वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह ने हिमालय के आध्यात्मिक पक्ष को भौतिक आवश्यकताओं से जोड़ा, जबकि परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर ने हिमालय से भारत को मिलने वाले भौगोलिक एवं प्राकृतिक लाभों पर चर्चा की।
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने संगोष्ठी की स्मारिका तथा ‘Blossoming of Natural Talent’ पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक का संपादन डॉ. आदित्य नारायण, डॉ. वीटा मेयलानी और लाखन सिंह ने किया है। संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ. सत्यवीर सिंह तथा समन्वयक डॉ. आदित्य नारायण रहे।
अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में पूर्व कुलपति प्रो. एम.एम. गोयल, हिमाचल प्रदेश से डॉ. राजेश कुमार तथा अंडमान-निकोबार से डॉ. विवेक कुमार साहू सहित अन्य विशेषज्ञ नेपाल से विषय विशेषज्ञ के रूप में जुड़े। तकनीकी सत्र में विषय विशेषज्ञों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने शोध पत्रों का वाचन एवं प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में डॉ अशोक श्रीवास्तव, डॉ सी एल बघेल, डॉ पी सी सिंघल उपस्थित रहे। इसमें ओरल, पोस्टर प्रेजेंटेशन में स्थान प्राप्त स्टूडेंट्स को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ आदित्य कुमार ने दिया। सेमिना में डॉ. सिमरन श्रीवास्तव, डॉ. दीप्ति, डॉ. राघवेंद्र दीक्षित, डॉ. हेमंत, डॉ. धीरेंद्र पाण्डेय, अतीत विजय सहित अनेक शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी और विशेष रूप से आमंत्रित उनके माता पिता उपस्थित रहे।





