सीएसजेएमयू में “बियॉन्ड द क्लासरूम – स्किल्स फॉर सक्सेस ” विषय पर एक संवादात्मक सॉफ्ट स्किल्स एवं रोजगारपरक कौशल विकास सत्र का सफल आयोजन

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सीएसजेएमयू में “बियॉन्ड द क्लासरूम – स्किल्स फॉर सक्सेस ” विषय पर एक संवादात्मक सॉफ्ट स्किल्स एवं रोजगारपरक कौशल विकास सत्र का सफल आयोजन
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वर्तमान प्रतिस्पर्धी कॉर्पोरेट जगत की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज की ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट कमेटी द्वारा बुधवार को “बियॉन्ड द क्लासरूम - स्किल्स फॉर सक्सेस ” विषय पर एक इंटरेक्टिव सॉफ्ट स्किल्स एवं एम्प्लॉयबिलिटी डेवलपमेंट सत्र का सफल आयोजन किया गया।

विश्वविद्यालय के यशस्वी कुलपति माननीय प्रो. विनय कुमार पाठक जी के प्रेरणा व मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन व माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। कार्यक्रम में अतिथि का स्वागत करते हुए स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के निदेशक व कार्यक्रम संयोजक डॉ. अमित कुमार ने कहा कि आपकी डिग्री आपको अवसर तक पहुँचा सकती है, पर उस अवसर का आप क्या करते हैं, ये आपके स्किल्स और आत्मविश्वास तय करेंगे। भारतीय ज्ञान परम्परा में भी शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व के समग्र विकास को माना गया है। आज के संदर्भ में भी यही दृष्टि हमें ज्ञान के साथ संचार, नेतृत्व, समस्या समाधान, नीति व आत्मविश्वास जैसे कौशल विकसित करने की प्रेरणा देती है।

इस ज्ञानवर्धक कार्यक्रम में प्रख्यात लाइफ स्किल्स कोच एवं मैनेजमेंट एक्सपर्ट नंदिता मौर्या (फाउंडर – आईईएलटीएस बाय नंदिता एवं नैनओम ट्रेनिंग सॉल्यूशंस) ने विशेष अतिथि व प्रशिक्षक के रूप में शिरकत की।

सुश्री मौर्या ने छात्रों को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया— "ज्ञान से क्षमता का निर्माण होता है, लेकिन बेहतरीन संचार कौशल उस क्षमता को दुनिया के सामने प्रदर्शित करता है।" उन्होंने अंग्रेजी को महज़ संवाद की एक भाषा बताया, न कि बुद्धिमत्ता मापने का पैमाना।

इस सत्र को पूरी तरह से गतिविधि-आधारित (एक्टिविटी-बेस्ड) रखा गया, जिसमें 'कच्ची प्रतिभा को निखारने' (आलू से फ्रेंच फ्राइज़ बनाने के रोचक उदाहरण के साथ) के व्यावहारिक गुर सिखाए गए। सफलता के 3 स्तंभ : छात्रों को 'प्रभाव के साथ संवाद', 'आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुति' और 'पेशेवर व्यवहार' के महत्व से अवगत कराया गया। कम्युनिकेशन के '3 सी': संवाद को स्पष्ट , संक्षिप्त और निरंतर रखने पर जोर दिया गया। एक्टिव लिसनिंग के लिए एल.ए.एस.टी. फ्रेमवर्क: 'पार्टनर चैलेंज' गतिविधि के माध्यम से छात्रों को एल.ए.एस.टी. तकनीक सिखाई गई, ताकि वे केवल जवाब देने के लिए न सुनें, बल्कि समझने के लिए सुनें। अल्बर्ट मेहराबियन का 55-38-7 नियम: 'साइमन सेज' जैसी गतिविधियों के जरिए बॉडी लैंग्वेज (55%), वॉयस टोन (38%) और शब्दों (7%) के सही तालमेल का अभ्यास कराया गया। साथ ही एक प्रभावशाली 'इंट्रोडक्शन स्ट्रक्चर' (मैं कौन हूँ, मैं क्या योगदान दे सकता हूँ, और मेरी भविष्य की आकांक्षाएं क्या हैं) तैयार करना भी सिखाया गया।

कार्यक्रम की समन्वयक असिस्टेंट प्रोफेसर एवं फैकल्टी प्लेसमेंट कोऑर्डिनेटर डॉ. अनमोल शेखर श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कहा कि कक्षा विद्यार्थियों को ज्ञान देती है, लेकिन कक्षा से बाहर अर्जित कौशल उस ज्ञान को सफलता में परिवर्तित करने की क्षमता प्रदान करते हैं। हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों में ऐसी रोजगारपरक क्षमता और जीवन कौशलों को विकसित करना है, जो उन्हें बदलते हुए वैश्विक कार्यक्षेत्र में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में सक्षम बनाए। उन्होंने छात्रों में गज़ब का उत्साह और नई ऊर्जा का संचार किया। कार्यक्रम का संचालन छात्र ऋत्विक मिश्र व हिमांशी द्विवेदी ने किया।

कार्यक्रम में डॉ. प्रशांत, डॉ. मानस उपाध्याय, डॉ. अभिषेक मिश्रा, डॉ. एस.पी. वर्मा, डॉ. शरद दीक्षित, डॉ. उद्धव, डॉ. अनुराधा शर्मा, अहमद अब्दुल्ला, शैलजा यादव, डॉ. मनोहर लाल, डॉ. उर्वशी, डॉ. अजय यादव आदि शिक्षकों समेत बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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