बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई विश्वकर्मा जयंती
*झांसी, 17 सितंबर 2026।* बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में गुरुवार को...

*झांसी, 17 सितंबर 2026।* बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में गुरुवार को...
*झांसी, 17 सितंबर 2026।* बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में गुरुवार को भगवान श्री विश्वकर्मा जयंती श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर हवन-पूजन एवं विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं ने सहभागिता कर भगवान विश्वकर्मा का विधि-विधानपूर्वक पूजन किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति *प्रो. मुकेश पांडेय* उपस्थित रहे। उनके साथ कुलसचिव ज्ञानेन्द्र कुमार, परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर, निदेशक इंजीनियरिंग *प्रो. डी. के. भट्ट, डीन इंजीनियरिंग प्रो. एम. एम. सिंह*, आईक्यूएसी निदेशक प्रो. सुनील काबिया तथा कार्यक्रम समन्वयक डॉ. जितेंद्र वर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्री विश्वकर्मा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन से हुआ। कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय सहित अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने हवन में आहुति देकर विश्वविद्यालय की उन्नति, तकनीकी शिक्षा के विकास, विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और राष्ट्र की समृद्धि की कामना की।
इस अवसर पर भगवान विश्वकर्मा को सृजन, निर्माण, तकनीकी कौशल और शिल्प-कला के प्रतीक के रूप में स्मरण किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि तकनीकी ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज एवं राष्ट्र की आवश्यकताओं के समाधान, नवाचार और आत्मनिर्भरता के लिए किया जाना चाहिए।
हवन-पूजन के उपरांत अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं को प्रसाद एवं स्वल्पाहार वितरित किया गया। इसके बाद आयोजित विशेष व्याख्यान सत्र में विद्यार्थियों को विज्ञान भारती के उद्देश्यों के साथ भारतीय वैज्ञानिक परंपरा, स्वदेशी ज्ञान-विज्ञान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शोध, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
वक्ताओं ने विद्यार्थियों से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निरंतर सीखने, शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने और अपनी तकनीकी प्रतिभा का उपयोग सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए करने का आह्वान किया। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के बीच समन्वय स्थापित कर आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए भी विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में चीफ प्रॉक्टर *प्रो. विनीत कुमार, प्रो. सौरभ श्रीवास्तव, प्रोवोस्ट प्रो. मुन्ना तिवारी, इं. ए.पी.एस. गौर, डॉ. विशाल आर्या, डॉ. राहुल शुक्ला, डॉ. सत्येंद्र उपाध्याय, डॉ. संदीप मिश्रा, डॉ. डॉ. शशिकांत वर्मा, डॉ. ब्रजेश लोधी, इं. रजत कुशवाहा, डॉ. महेंद्र कुमार, डॉ. शुभांगी निगम, इं. राजेश वर्मा, डॉ. ललित गुप्ता, डॉ. दिनेश द्विवेदी, श्री इंद्रेश खेबरिया, श्री रामनिवास एवं श्री रमन सिंह सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के समन्वयक, शिक्षक, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। विश्वकर्मा जयंती का यह आयोजन परंपरा, तकनीकी शिक्षा, वैज्ञानिक चेतना और नवाचार के समन्वय का संदेश देते हुए विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल और सृजनशीलता के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा दे गया।





