प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में जले ‘आशीर्वाद के दीये’*

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प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में जले ‘आशीर्वाद के दीये’*
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*झांसी।* प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश शासन की मंशा एवं निर्देशों के अनुपालन में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी द्वारा संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय की प्रेरणा से आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं के साथ केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों एवं आम नागरिकों ने भी सहभागिता की।

कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और आत्मीयता की भावना को अभिव्यक्त करते हुए सेवा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के मूल्यों को सुदृढ़ करना रहा। भारतीय जीवन-दृष्टि में वरिष्ठजनों को अनुभव, संस्कार और जीवन-मूल्यों का संवाहक माना जाता है। इसी भावभूमि को केंद्र में रखते हुए कार्यक्रम के माध्यम से नई पीढ़ी को वरिष्ठजनों के अनुभव, धैर्य, अनुशासन और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ने का संदेश दिया गया।

विश्वविद्यालय परिसर के साथ ही विभिन्न छात्र एवं छात्रा छात्रावासों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने दीप प्रज्ज्वलित किए। इन दीपों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना के साथ वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना भी व्यक्त की गई।

कार्यक्रम में कुलसचिव ज्ञानेन्द्र कुमार, सेवा संकल्प अभियान के नोडल अधिकारी प्रो. मुन्ना तिवारी, वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर, उप कुलसचिव शेख अंजुम, डॉ. श्वेता पांडेय, डॉ. यतीन्द्र मिश्र सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के माध्यम से विश्वविद्यालय परिवार को सेवा-भावना से जोड़ने तथा समाज के प्रति अपने दायित्वों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि संवेदनशील, संस्कारित और सामाजिक रूप से उत्तरदायी नागरिकों का निर्माण भी उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण दायित्व है।

सेवा संकल्प अभियान की व्यापक भावना के अनुरूप यह आयोजन सेवा, सम्मान, संवेदना और संकल्प को एक सूत्र में जोड़ने वाली पहल के रूप में सामने आया। कार्यक्रम ने पीढ़ियों के बीच संवाद और आत्मीय संबंधों को सुदृढ़ करने के साथ विश्वविद्यालय की सामाजिक प्रतिबद्धता को भी अभिव्यक्त किया।

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