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बचपन एक्सप्रेस पर अब हर दिन फिल्म और फोटोग्राफी पर एक लेख पढ़े

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वाइट बैलेंस

आप जब भी कैमरा पकड़ते है तो कई ऐसे तत्व है जिनका अगर ध्यान दे तो हम बड़ी आसानी से अपने फोटोग्राफ की गुणवत्ता को सुधार सकते है - आजकल सभी के हाथ में अत्याधुनिक फोन और कैमरा है जिसकी सहायता से लोग अच्छा फोटो खींच भी लेते है - पर फोटोग्राफर उसे ही कहा जा सकता है जो फोटो के तत्व को समझता हो और किसी की भी मांग के अनुसार फोटो में उस तरह के तत्व का समावेश कर पाए जिसकी आवश्यकता होती है -

फोटोग्राफर और इमेजग्राफर

इन दो शद्बों का मैं इसलिए प्रयोग कर रहा हु क्योंकि आज कल लोग इमेज किसी भी कैमरा से खींच लेते है और कई बार वो इमेज बहुत अच्छी होती है - पर ऐसे लोगो को फोटोग्राफर की श्रेणी में न रख कर मैं उन लोगो को इमेजग्राफर (नया शब्द ) की श्रेणी में रखता हु - इन लोगो के द्वारा ऑटो मोड़ में की जा रही फोटोग्राफी तब तक इन्हे फोटोग्राफर की श्रेणी में नहीं ले जा सकती जब तक ये लोग मैन्युअल तरीके से फोटोग्राफी के बाकि के तत्वों को अपने अनुसार बदल कर फोटो न हासिल कर पाए -

कैमरा और हमारी आँखे

वास्तव में कैमरा हमारी आँखों का ही एक एक्सटेंडेड भाग है - पर ईश्वर निर्मित मानव कैमरा में तस्वीर बिलकुल साफ़ और सही आती है और उसमे परिवर्तन तब होता है जब हमें कोई शारीरिक परेशानी होती है -

कैमरा

१) वाइट बैलेंस की जरुरत होती है

२) इमेज साइज को छोटा बड़ा कर सकता है

३) कलर की पहचान के लिए लाइट को एडजस्ट करना पड़ता है

४) ज्यादा लाइट और कम लाइट में एडजस्ट करना पड़ता है

५) कैमरा हमें बहु आयामी फोटो देता है

६) कैमरा हमें लेंस की सहायता से कई तरह के

दृश्य लेने में सहायक सिद्ध होता है


मानव की आँख


१) वाइट बैलेंस की कोई जरुरत नहीं है


२) इमेज साइज को छोटा बड़ा करने के लिए शारीरिक रूप से आगे पीछे होने की जरुरत होती है


३) कलर को अपने आप पहचान लेती है जब तक की कोई शारीरिक कमी न हो


४) आँखे अपने आप काम और ज्यादा लाइट को एडजस्ट कर लेती है


५) आँखे हमें एक ही एंगल से देखने की सुविधा देती है


६) आँखों से हमें एक ही प्रकार के दृश्य मिलते है





वाइट बैलेंस की जरुरत :

कैमरा को ये बताने की आवश्यकता होती है की वाइट लाइट क्या है - पर हमारी आँखे अपने आप ये काम कर लेती है - अगर आप के पास अच्छा कैमरा है तो उसमे वाइट बैलेंस करने के लिए आप मैन्युअल मोड़ में कर सकते है या फिर कैमरा को ५२०० या फिर ३२०० केल्विन पर सेट कर सकते है - ५२०० पर हमें कैमरा दिन की रौशनी का दृश्य देता है जहाँ पर फ्रेम में नीला रंग प्रभावी होता है वही पर ३२०० हमे रात का आभाष देता है और पीला रंग प्रभावी होता है -



ऑटो मोड़ पर कैमरा सेट कर देने पर कई बार परेशानी होती है क्योंकि लाइट का टेम्प्रेचर अलग अलग परिस्थितियों में अलग होता है इसलिए कई बार आपके शॉट में कलर की समस्या भी आ सकती है -

लाइट टेम्प्रेचर :

अगर हम लाइट टेम्प्रेचर का ध्यान दे तो हमें फोटोग्राफ खींचते समय कलर की कोई समस्या नहीं आएगी - बल्कि अगर कर को आपको समझना है तो लाइट के टेम्प्रेचर को समझना ज्यादा अच्छा होगा - जब हम वाइट बैलेंस करते है तो कैमरा वाइट लाइट को समझ जाता है और बाकी के कलर को वो सही तरीके से दिखाता है - अगर हमने वाइट बैलेंस नहीं किया है तो फ्रेम में कलर सही नहीं आएगा और इमेज की खूबसूरती प्रभावित होगी -





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