कंगना रनौत के बंगले पर कारवाई पर हाई कोर्ट सख्त , बीएमसी से पूछा किस बात की जल्दी थी

कंगना रनौत के बंगले पर तोड़ फोड़ के केस में आका फसे या न फसे पर उनके सरकारी अधिकारी पर गाज गिरती नजर आ रही है - जिस तरह से बीएमसी पर हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पड़ी की है उससे ये अंदाज लग जाता है की कोर्ट को सब मालूम है - यहाँ तक की जब कोई जवाब दाखिल करना होता है तो भी इतनी जल्दी नहीं होती और यहाँ तो सबेरे नोटिस दिया , मालिक के आने का भी इन्तजार नहीं किया और हथोडा चला दिया - पर ये हथौड़ा बीएमसी की साख पर चला है जो बीच चौराहे के अतिक्रमण तो हटा नहीं पाती और घर के अंदर जब कोई कंस्ट्रक्शन नहीं चल रहा था तब इतनी जल्दी बाजी क्या थी तोड़ फोड़ की -

कोई अँधा भी बता देगा की ये बदले की कारवाई है पर शिवसेना को इससे कोई फरक पड़ता नजर नही आता क्योंकि ये पार्टी यही सब कुछ कर आज मुख्यमंत्री के पद तक पहुच चुकि है और ऐसा ही रहा तो इनके प्रधानमंत्री भी बनने के इस लोकतंत्र में चांस तो बनता ही है -

इससे बड़ा मजाक और कुछ भारत के लोकतंत्र के लिए कुछ नहीं हो सकता जहा सरकार ही बदले की कारवाई पर उतर आये और मंत्री लिखे की उखाड़ दिया - अरे जनाब आपने किसी का बंगला नहीं उखाड़ा बल्कि लोक में तंत्र को उखाड़ फेका -

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