रामचरितमानस में मौजूद है लोकसंचार के विविध आयाम- प्रो. अनुराग दवे

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रामचरितमानस में लोकसंचार विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी के मीडिया एवं संचार विद्यापीठ के पत्रकारिता विभाग में संपन्न हुआ।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता, बीएचयू के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के प्रोफेसर अनुराग दवे ने रामचरितमानस की प्रासंगिकता और वर्तमान परिदृश्य में मानस की परंपरा को रेखांकित किया।

प्रोफेसर दवे ने रामचरितमानस में संचार की नवीन अवधारणाओं को खोजने के लिए अकादमिक अनुसंधान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने छात्रों को बताया की किस तरह वो रामचरित मानस में संचार के सात सी के बारे में जान सकते है जिसका उन्होंने सोदाहरण वर्णन किया |

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मीडिया एवं जनसंचार विद्यापीठ के अध्यक्ष प्रोफेसर गोविंद पांडेय ने तुलसीदास को लोक संचारक के रूप में उनकी उपस्थिति को भारत के लिए गौरवशाली बताया। प्रो पांडेय ने रामचरित मानस में गुरु और सत्संग की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया की किस प्रकार एक गुरु सालों लगाकर जो ज्ञान अर्जित करता था उसे अपने शिष्यों को कुछ क्षण में ही बता देता था |

रामचरित मानस में लोकसंचार के बारे में बाते करते हुए प्रो पांडेय ने बताया कि महान दार्शनिक अरस्तू के लोक संचार के सिद्धांतो के साथ ही साथ संचार के रेखीय और सर्कुलर सिद्धांतो को किस तरह मानस से लिया जा सकता है उसका उदाहरण के साथ वर्णन किया |

अकादमिक सत्र में मुख्यवक्ता के रूप में प्रोफेसर सर्वेश सिंह ने रामचरितमानस को लोक की किताब बताया। साथ ही रामचरितमानस में कथात्मक संचार की मौजूदगी को भी रेखांकित किया। सर्वेश जी ने रामचरित मानस के बारे में व्याप्त भ्रांतियों के बारे में बात करते हुए बताया कि किस तरह मानस का पाठ शिव -पार्वती से निकलकर गरुण और कागभुषण्डि तक पहुँचता है जो इस बात का उदाहरण है की ये सर्व समाज का भी काव्य है |

उन्होंने कहा कि तुलसीदास रचित मानस के बारे में बात करने के लिए हमे तत्कालीन राज्य और समाज की व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए और किसी भी दोहे और चौपाई का अर्थ समग्रता के साथ देखा जाना चाहिए |





संगोष्ठी में राजर्षि टंडन की जनसंचार एवं पत्रकारिता की शिक्षिका डॉ साधना श्रीवास्तव ने बताया कि किस तरह रामचरित मानस समाज के हर वर्ग और व्यक्ति के बारे में बात करता है |

इस संगोष्ठी में प्रियंका सिंह , शालिनी श्रीवास्तवा , आशुतोष राय समेत अन्य वक्ताओं ने अपनी राय रखी |





संगोष्ठी में विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए अध्यापक और विद्यार्थियों ने रामचरितमानस में लोक संचार विषय पर शोधपत्र पढ़े। संगोष्ठी के प्रथम सत्र का संचालन पत्रकारिता एवं जनसंचार विद्यापीठ के आचार्य डॉक्टर अरविंद कुमार सिंह ने किया। वहीं दूसरे सत्र का संचालन आचार्य कुंवर सुरेंद्र बहादुर ने किया। कार्यक्रम का प्रतिवेदन और अतिथियों का आभार विद्यापीठ के आचार्य डॉक्टर लोकनाथ ने किया।

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